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Tuesday 21 Nov 2017

मैं महेन्द्र राजा जैन का आभारी हूं कि उन्होंने प्रस्तावना पर इतने विस्तारपूर्वक टिप्पणी की। इस संबंध में मेरा निवेदन निम्नानुसार है-

 

मैं महेन्द्र राजा जैन का आभारी हूं कि उन्होंने प्रस्तावना पर इतने विस्तारपूर्वक  टिप्पणी की। इस संबंध में मेरा निवेदन निम्नानुसार है-
1. जनसत्ता अखबार दिल्ली और इलाहाबाद में उपलब्ध होता होगा, किंतु वह छत्तीसगढ़ में प्रसारित नहीं होता। इसलिए मुझे किंचित भी जानकारी नहीं है कि शब्दकोश पर उसमें क्या चर्चा हुई। पाठक सहमत होंगे कि दिल्ली में होने वाली बहसों से पूरे भारत की तस्वीर पता चल जाए, ऐसा नहीं है।
2. मेरा मानना है कि समय के साथ अंग्रेजी के जो शब्द हिन्दी में प्रचलित हो गए हैं तथा हिन्दी में जिनका विकल्प नहीं है, उनको ले लेना चाहिए। श्री जैन ने मनोयोग से वर्धा हिन्दी शब्दकोश की सूक्ष्म विवेचना की है, वह मेरी सामथ्र्य के परे है। मैं सहमत हूं कि जहां अनावश्यक तौर पर अंगे्र•ाी शब्दों को शामिल किया गया है, उन्हें हटा देना उचित होगा।
3. मैं जैन साहब की सुव्यवस्थित शोध परायणता का कायल हूं। उन्होंने समय-समय पर इसका परिचय देते हुए कुछेक पुस्तकों पर जो टीकाएं की हैं वे अक्षर पर्व में छपी हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि वर्तमान प्रसंग में उनकी इस विस्तृत टीका से पाठकों के बीच बहस छिड़ेगी और इस बहाने कुछ बातें स्पष्ट होंगी।
4. जैन साहब की टीका से इलाहाबाद के साहित्य जगत के द्वन्द्वात्मक संबंधों की हल्की सी गंध आती है। उस पर कोई टीका करना विषय को अन्य दिशा में ले जाना होगा।    -ललित सुरजन