Monthly Magzine
Thursday 23 Nov 2017

लघुकथा : माँ का दिल


मार्टिन जॉन
किस से बातें हो रही थी ?
माँ का फ़ोन था ।
क्या बोल रही थीं ?
कुछ नहीं .....बस यूं ही ....समय पर खाना खा लेने , समय पर सोने वगैरह की हिदायतें ...।
माँ भूल रहीं हैं कि अब हम शादी-शुदा हैं । हमारी लाइफ़ रूटीन बदल चुकी है ।.....बच्चों वाली हिदायतों की अब ज़रुरत नहीं !
अभी तुम नहीं समझोगी माँ का दिल !
ऊँह ! वह झटके से उठकर जूठे प्यालों को किचन में रखने चली गई । शीला की इस हरकत पर वह मुस्करा कर अखबार के पन्ने पलटने में मशगूल हो गया ।
बरसों बाद ।
देख बेटा ,खाने-पीने पर ध्यान देना .....रात को ज़्यादा जागना मत ।.....और हाँ , सोने के पहले दूध ले लेना ........सुबह उठकर थोड़ी बहुत एक्सरसाइज कर लेना । इस से सारा दिन तरोताज़ा महसूस करोगे और पढ़ाई में भी ध्यान लगा रहेगा ।...और सुन बेटा ...
बस भी करो शीला ! रोज़-रोज़ इतनी सारी हिदायतें देती रहती हो फ़ोन में ।.....तुम भूल जा रही हो कि हमारा बेटा अब बच्चा नहीं रहा । इंजीनियरिंग कॉलेज का स्टुडेंट है वो .....उसमे मैच्युरिटी आ चुकी है
शीला ने भरपूर नजऱों से उसे देखा , तुम नहीं समझोगे माँ का दिल !
बरसों पहले वाली मुस्कराहट उसके होठो पे चस्पां हो गई ।
अपर बेनियासोल , पोस्ट –आद्रा , जिला – पुरुलिया
(पश्चिम-बंगाल ) ।23121 मो . 098009404।