Monthly Magzine
Tuesday 21 Nov 2017

संस्कृति समाचार

बांग्ला दलित साहित्य पर हिंदी में पहली किताब का प्रकाशन

बांग्ला दलित साहित्य पर बजरंग बिहारी तिवारी की सम्पादित पुस्तक बांग्ला दलित साहित्य :सम्यक अनुशीलन का लोकार्पण 5 फरवरी 2016 को संपन्न हुआ। यह पुस्तक नयी किताब प्रकाशन, शाहदरा, दिल्ली से प्रकाशित हुई है।  
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध नारीवादी चिंतक व दलित लेखिका विमल थोरात ने किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि यह पुस्तक ऐसे समय में आयी है जब हम बड़े नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। इस पुस्तक का आना एक अच्छा सूचक है। इस पुस्तक के अनुवाद के बारे में उनका कहना था कि पुस्तक पढ़ते हुए कहीं से भी यह नहीं लगता कि यह अनुवाद है बल्कि यह मूल जैसा लगता है।  प्रमुख वक्ताओं में दयाल सिंह महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की डॉ. ब्रती विश्वास ने अपने वक्तव्य में कहा कि बंगाली दलित साहित्य पर हिन्दी में आयी यह पुस्तक अद्भुत है। इस पुस्तक में बंगाली समाज की स्थिति साफ दिखाई देती है। अन्य राज्यों की तुलना में बंगाल के दलितों का कम दमन हुआ है। डॉ. विश्वास ने कहा कि बंगाल में दलित और गैरदलित की भाषा में समानता दिखाई पड़ती है। देशबंधु महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ. छोटूराम मीणा ने कहा कि यह पुस्तक बंगाल और हिन्दी समाज के दलितों को जोडऩे का सराहनीय काम करती है। दलित नारीवादी लेखिका अनिता भारती ने पुस्तक पर बोलते हुए कहा कि यह चुनौती भरा काम था। सम्पादक के अथक परिश्रम, लगन और ईमानदारी के परिणामस्वरूप ही यह पुस्तक आ सकी है। इस पुस्तक को लाने के लिए अनिता जी ने सम्पादक और अनुवादकों की बहुत तारीफ  की।  सुपरिचित कवि और स्त्रीवादी आलोचक अनामिका ने पुस्तक पर बात करते हुए बताया कि बजरंग बिहारी तिवारी की सर्वसमावेशी दृष्टि पुस्तक में दिखाई देती है। उन्होंने आगे कहा कि भूख और अपमान यह दोनों दुनिया के महान दुख हैं। इन दोनों दुखों की विस्तार से चर्चा पुस्तक में हुई है। बांग्ला दलित साहित्य:सम्यक अनुशीलन किताब सुप्रसिद्ध भाषाविद और अनुवादिका डॉ कुसुम बांठिया को समर्पित है। अपने वक्तव्य में कुसुम बांठिया ने कहा कि उन्हें इस किताब के प्रकाशन से परम संतोष का अनुभव हो रहा है। उनका कहना था कि बजरंग ने सारे बाहरी काम करते हुए भी कॉलेज और अपनी कक्षाओं के प्रति पूरी ईमानदारी बरती है।  बजरंग बिहारी तिवारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस परियोजना ने उन्हें बहुत समृद्ध किया है। सामग्री संकलन और अनुवाद के सिलसिले में अपनी कोलकाता यात्राओं से मिले अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि बांग्ला दलित रचनाकारों और अनुवादकों से उन्हें पूरा सहयोग मिला है। उनका कहना था कि इस किताब के प्रकाशन में वे निमित्त मात्र हैं।      राम बिहारी तिवारी,  मो. 09013754804