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Monday 20 Nov 2017

अक्षरपर्व जुलाई अंक में मानवाधिकार और प्रेमचंद शीर्षक आलेख को पुष्ट विश्लेषण से भरपूर पाया।

अक्षरपर्व जुलाई अंक में मानवाधिकार और प्रेमचंद शीर्षक आलेख को पुष्ट विश्लेषण से भरपूर पाया। लेखक को बधाई। उन्होंने प्रेमचंद की रचनाओं का विश्लेषण ठीक-ठीक किया है। प्रेमचंद की कहानियों को एक-एक कर हर अंक में स्थान मिले तो सामान्य जन के स्मरण में रहे। उनका साहित्य तो कालजयी है। कुछ रचनाएं पत्रिका की दृष्टि से लंबी पड़ती हैं, जो सार रूप में आवें तो पठनीय होंगी, ऐसा मेरा ख्याल है।  
गिरीशचंद्र चौधरी, भारतेंदु भवन, वाराणसी