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Tuesday 20 Feb 2018

उत्सव अंक संग्रहणीय है। ललित जी की सिद्धहस्त लेखनी में प्रस्तावना पत्रिका का संपूर्ण सार है।

उत्सव अंक संग्रहणीय है। ललित जी की सिद्धहस्त लेखनी में प्रस्तावना पत्रिका का संपूर्ण सार है। भीष्म साहनी, अलका सरावगी, गिरिराज किशोर, महेश अनघ, संजीव, उदय प्रकाश, आदि महान कथाकारों की कहानियों का संकलन काबिले तारीफ है। पत्रिका का अंत कहानी और इंसान शीर्षक उपसंहार से होता है। अंत भला तो सब भला। आवरण सज्जा ने भी इस अंक में चार चांद लगा दिए।
डा. विकास कुमार, अमगावां, पो.शिला, प्रखंड सिमरिया, जिला चतरा, झारखंड