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Friday 24 Nov 2017

बख्शीश

 

 डॉ. श्यामबाबू शर्मा
'कुछ खास तो नहीं हैं, इन्हीं से काम चलेगा।Ó
बाजार में तो त्योहारों की रौनक बखूबी देखी जा सकती थी। मैं,पत्नी रश्मि को खरीदारी में मदद कर रहा था। खरीदारी को पूर्णता देते हुए अंत में साड़ी काउण्टर पर पहँुचा। तमाम लेटेस्ट डिजायन और वेरायटीज को रिजेक्ट करते हुए काफी जद्दोजहद के बाद गृहलक्ष्मी जी को लक्ष्मी पूजन, रंगोली, डेकोरेशन तथा दीपमालिका हेतु साडिय़ाँ पसंद आई थीं। शॉपिंग कर पेमेन्ट काउन्टर पर बिल चुकता करने के लिए जब क्रेडिट कार्ड आगे बढ़ाया तो श्रीमती जी ने नियतश्रव्य संवाद शैली में कुछ संप्रेषित किया। शायद कुछ याद  आया था।............नाचहिं नर मरकट की नाई। वह सीधे मॉल के साड़ी वाले काउण्टर पर पुन: चल दिया।
हलो, यूं कुछ सस्ती चलताऊँ साडिय़ाँ दिखाईएगा।
मैम, आपकी सेलेक्टेड साडिय़ाँ तो अभी-अभी बिल काउण्टर पर भेज दी गई हैं। मजाक कर रही हैं?
अपने लिए नहीं , दीवाली पर मेड वगैरह को भी तो बख्शीश देनी पड़ती है। सो कुछ वैसी टाइप दिखाइए। तीन चार सौ के आस पास चल जायेगी।Ó
रश्मि बख्शीश और दीवाली शब्द पर जोर डालते हुए नीलेश की तरफ  देख रही थी। कई साडिय़ों को उलटने- पलटने के बाद उसने आखिर एक साड़ी चुन ही लिया। उसके इस उदात्त कार्य और चिंतन पर पति महोदय बाग-बाग थे। याद नहीं आता था कि पहले कभी उसने दीवाली पर इतनी दरियादिली दिखाई हो।
अगले दिन नौकरानी उर्मिला बुहार-पोंछा निपटाकर जाने लगी तो नीलेश ने रश्मि को आवाज दी, यह जा रही है......। आगे श्रीमती जी स्वयं कॉमनसेन्स वाली थीं सो जुर्रत कहाँ कि कहें, इसका गिफ्ट दे दो।
'हां मुझे मालूम है नीलू। कल इसकी छुट्टी है। कोई बात नहीं। माँ जी तो हैं न...........।Ó
नीलेश को कुछ अटपटा सा जरुर लगा परंतु सब कुछ समन्वय भाव में देखने वाला वह इतना ही कह सका, हाँ -हाँ मिलकर काम निपटा लिया जायेगा।
भोर में अम्मा पोते को दुलार रही थीं, उठा लाला विवेक, वैभवा को भी जगाइ दे आजु अमावस है। जल्दी-जल्दी नहाव-ध्वाव। आजु हम तुम सबका खातिर पेड़ा बनाईब।
ओह ओह....... कौन है? नीलू जरा चाय दीजिएगा। इतनी टायर्डनेस है कि ....। और अपनी कौशल्या मैया से कहो कि नींद नहीं आती तो सफाई कर डालें।
न्यूक्लियर फैमिली ने विद्युत लडिय़ों, पटाखों और अम्मा के पेड़ों से भी लजीज माउथ वाटरिंग पकवानों तथा नववस्त्र धारण कर दीपोत्सव मनाया।
लरिका-बहुरिया पोता सब सुखी रहैं लक्ष्मी मइया। पूरे परिवार के साथ-साथ अम्मा ने भी इस बार नई साड़ी में परिवार की सुख-शांति, ऐश्वर्य और मंगल की प्रार्थना की।
अतिथि प्रवक्ता
हिंदी विभाग
नेहू, शिलांग
मो.-986353157