Monthly Magzine
Monday 20 Nov 2017

क्या, कब, कहाँ? :हंस पत्रिका की कुंडली

श्रीरंग  
128 एम 1 आर  कुशवाहा मार्केट, भोला का पूरा,

प्रीतमनगर इलाहाबाद 211011  मो . 9335133894  
संदर्भ साहित्य के जाने-माने लेखक महेंद्र राजा जैन ने क्या, कब, कहाँ? शीर्षक से राजेंद्र यादव द्वारा सम्पादित हिंदी की सर्वाधिक चर्चित पत्रिका हंस की कुंडली बना कर हिंदी सन्दर्भ साहित्य की एक बहुत बड़ी कमी पूरी की है। कुंडली याने पूरा लेखा-जोखा याने हंस में कब क्या छपा, कुछ छपा या नहीं, किसने क्या लिखा और क्या नहीं लिखा, किस पुस्तक की किसकी लिखी समीक्षा छपी और कब छपी, हंस में छपी किसी रचना पर किसकी क्या प्रतिक्रया हुई, मेरी-तेरी उसकी बात, में कब-कब, क्या-क्या छपा, आदि यह तथा हंस से संबंधित और भी बहुत सी सूचनाएं इस प्रकार वैज्ञानिक ढंग से एक ही अकारादि क्रम में इस प्रकार रखी गई हैं कि पुस्तक का उपयोग करनेवाले को कोई भी सूचना मिनटों में मिल सकती है।
कहने की आवश्यकता नहीं कि हिंदी में किसी भी पत्रिका के सम्बन्ध में किया गया यह पहला कार्य है, किसी भी पत्रिका की इस प्रकार की सूची या इंडेक्स बनाना बहुत ही श्रमसाध्य कार्य है। राजेन्द्र यादव द्वारा संपादित हंस हिंदी की बहुत महत्वपूर्ण पत्रिका रही है, इसमें देश के तमाम विद्वानों के विविध विषयों पर आलेख और साहित्य-संस्कृति विमर्शों से सम्बंधित लेख उपलब्ध हैं। पर कौन सा लेख कब छपा, यह कैसे पता कैसे चलेगा? इसका उत्तर है- यह ग्रन्थ क्या, कब, कहाँ? इससे जिज्ञासुओं को अकारण और बार-बार हंस की फाइलों के पन्ने पलटने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी और समय भी नष्ट नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि इस सूची में रचनाकारों के नाम, रचनाओं के शीर्षक, विषय तथा समीक्षाएं आदि सभी कुछ देवनागरी लिपि के एक ही अकारादि क्रम में रखे गए हैं। विषय या रचनाओं के शीर्षक एक ही अकारादि क्रम में रखने के लिए नाम के एक ही रूप का प्रयोग किया गया है और नाम में भिन्नता होने की स्थिति में प्रयोग नहीं किए गए रूप से, प्रयोग किए गए रूप का देखिए सन्दर्भ दिया गया है। व्यक्तिगत नामों की प्रविष्टियाँ नाम के प्रथम भाग पर रखी गई हैं, पाश्चात्य लेखकों के नाम कुल नाम पर रखे गये हैं। समीक्षाएं समीक्षकों के नाम के साथ ही रचनाकार तथा रचना के शीर्षक पर भी हैं। विषय शीर्षक के लिये शब्द का रूप चुनने में एक ही बहुप्रचलित रूप का प्रयोग कर समानार्थी शब्दों से देखिए या और देखिए सन्दर्भ दिये गये हैं। हिंदी की सभी प्रतिष्ठित एवं स्थायी महत्व की पत्र-पत्रिकाओं की इस प्रकार की विषय सूची हिंदी की एक महती आवश्यकता है। सरस्वती, चाँद, कल्पना, माधुरी जैसी बंद हो चुकी पत्रिकाओं का अपना अलग महत्व है। इसी प्रकार वर्तमान में निकल रही आलोचना, वागर्थ, कथादेश, समकालीन भारतीय साहित्य, अक्षर पर्व आदि पत्रिकाएँ भी हैं जिनमें समय समय पर महत्वपूर्ण लेख निकलते रहते हैं। इन सभी पत्रिकाओं का इसी प्रकार का इंडेक्स बना लिया जाए तो शोधकर्ताओं के साथ ही लेखकों, संपादकों, पत्रकारों आदि को किसी लेखक या किसी विषय की कोई रचना का पता लगाने में बड़ी आसानी होगी तथा काफी समय भी बचेगा।