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Wednesday 22 Nov 2017

हेरोडिऑस (3)

गुस्तेव फ्लाबेअर
अनु. इंदुप्रकाश कानूनगो
 282  रोहित नगर (प्रथम) गुलमोहर भोपाल  262039
मो. 09981014157
अहाब से उसकी तुलना करते हुए उसे विलासी बागान बनवाने, अपनी प्रतिमाएँ गढ़वा कर लगवाने, हाथीदाँतों और कीमती लकडिय़ों को तराश अपने उपस्करों का निर्माण करवाने के लिए उसे कोसा।
    एंटिपास ने गला लपेटी महीन डोरी तोड़ उससे बंधी शाही मोहर को अलग कर उसे गड्ढे में फेंक बंदी को जबान संभालने का आदेश दिया।
    लेकिन लेओकनान ने जवाब दिया: ''मैं किसी वहशी भालू क्या, किसी जंगली गधे क्या, प्रसव-पीड़ा से कराहती किसी स्त्री समान जोर-जोर से चीखूँगा! ईश्वरीय दण्ड तेरे कौटुम्बिक-व्यभिचार पर, यूँ ही, स्वयंमेव, तेरे सिर मंडरा रहा है! मेरे ईश्वर ने तुझे खच्चरों की पुंसत्वहीनता प्रदान की है!ÓÓ
    इन शब्दों के सुनाई पड़ते, श्रोताओं के बीच किसी दबी-दबी हँसी की ध्वनि उभरी।
    लेओकनान के बोलते जाते क्षणों वाइटेलियस कालकोठरी के निकट कान लगाये खड़ा रहा। उसका दुभाषिया, निरावेग स्वर में, अंधेरी कारा से गरजती आ रही सारी धमकियों और भत्र्सनाओं का, रोमन जुबान में तरजुमा करता गया। टेट्रार्ख और हेरोडिऑस, दोनों ही को बाध्य हो उसके निकट खड़े रहना ही पड़ा। एंटिपास, गहरी साँसे लेता, सब सुनता गया; और हेरोडिऑस, मुँह फाड़े गड्ढे की गहराइयों में टकटकी लगाये खड़ी की खड़ी रही, उसका चेहरा भय और घृणा के भाव से जा भरा।
    भयानक आदमी अब उसकी जानिब जा घूमा। कारा के सरियों को कस कर पकड़, उन पर दाढ़ी के बालों भरा अपना -जलते कोयलों सी आँखे भभकाता-चेहरा गड़ा चीख पड़ा:
    ''ओह! ये तुम हो ज़ेज़ेबेल? अपने पुट्ठों को मटका-मटका तुमने स्वामी का दिल वश कर लिया। किसी घोड़़ी की मानिंद उसके आगे हिनहिनायी। पर्वतीय शिखर पर अपना बिछौना लगाया ताकि अपनी कुर्बानी चरितार्थ कर लो! ...
    ''प्रभु जगमग जवाहरातों को तुमसे छीन लेगा, तुम्हारी बढिय़ा-बढिय़ा बैंजनी पोशाकों और महीन परिधानों को भी; भुजाओं को कसे बाजूबंदो को, पैरों पर चढ़े नुपुरों को भी; मस्तक पर झूल रहे आभूषणों, चमकते चांदी के दर्पणों, शुतुरमुर्ग के फरों से बने पंखों, कद ऊँचा कर रहे मोती-गुँथे जूतों, जगमगाते हीरों, केशों के इत्रों, नाखूनों के रंगीन पॉलिशों को भी छीन लेगा-तेरे नाजनखरों का सारा कौशल लोप हो जायेगा, और, व्यभिचारिणी के ऊपर पत्थरों को दागने के लिए तोपें लगायी जायेंगी!ÓÓ
    अपने बचाव का कोई वचन सुनने हेरोडिऑस ने इधर-उधर नजरें घुमायीं। फेरिजियों ने- यों कि अगर उसके प्रति हमदर्दी दर्शायी तो कहीं प्रोकौंसल नाराज न हो जाये, इस आशंका से- सिर घुमा लिये। एंटिपास प्राय: सुध खो बैठा।
    कालकोठरी से उभरी आवाज और ऊँची होती गयी;  निकटवर्ती पहाडिय़ों ने सनसनीखेज प्रतिध्वनि गुंजायी, और, उस क्षण, मेकाएरस, सचमुच, अभिशापों की बौछारों से जा घिरा मालूम दिया।
    ''तू खुद-ब-खुद कीचड़ में जा गिर, बेबीलोन की औरत, कीचड़ में, और स्वयं को कोड़ों से पिटवा ले! करधनी खोल दे, जूते खोल दे, वस्त्रों को उठा बहती धारा में चल; तेरी बेहियायी तेरे पीछे-पीछे चलेगी, तेरा कलंक पूरी बस्ती में जाहिर हो जायेगा, सुबकते-सुबकते मेरी छाती फट जायेगी। ईश्वर ही तेरे गुनाहों की सड़ांध से नफरत करता है! घिनौनी! जा, कुतिया समान मर!ÓÓ
    तत्क्षण, जालीदार दरवाजा एकाएक भिड़ा दिया गया और मैन्यूअॅस ने उसे कस कर जकड़ दिया कि जो उसी वक्त लेओकानन का गला वहीं का वहीं दबा डालना चाह रहा था।
    हेरोडिऑस सरपट भागती-भागती महल में लोप हो गयी। सारा कुछ सुने फेरिज़ी लोग बड़े विक्षुब्ध हुए। उनके बीच खड़े एंटिपास ने अपने बीते आचरण को न्यायोचित ठहराते हुए मौजूदा हालत पर अफसोस जाहिर किया।
    ''हो सकता है,ÓÓ एलिएज़ार बोला, ''कि भाई की स्त्री से विवाह करना उसके लिए आग्रही हो; लेकिन हेरोडिऑस विधवा नहीं थी, और फिर उसकी एक संतान है जिसे उसने त्याग दिया है; अत: यह घृणास्पद है।ÓÓ
    ''तुम ठीक नहीं कह रहे हो,ÓÓ जोनाथस सैड्जूसी ने टोंका; ''कानून बेशक ऐसे विवाहों की भत्र्सना करता है लेकिन दरअसल उनका निषेध नहीं करता।ÓÓ
    ''कौन सा पहाड़ जा टूटा? सारी दुनिया क्यों मेरे खिलाफ आ खड़ी है?ÓÓ खार खाता एंटिपास बोल पड़ा, ''जाने क्यों? एब्सालोम ने भी तो अपने पिता की पत्नियों से हमबिस्तरी की, जुदाह ने पुत्रवधू के, और अमोन ने अपनी बहिन के, और लाट ने अपनी बेटियों के साथ की।ÓÓ
    महल में कुछ क्षण सुस्ता पुन: दरबार में लौटे ऑउलस ने बहस को पल भर सुन टेट्रार्ख के रवैये का अनुमोदन किया। ''ऐसी बेमतलब टीका-निंदा सुन किसी आदमी को खफा होने की कोई जरूरत नहीं।ÓÓ फिर, पादरियों-पुजारियों द्वारा प्रतिपादित वर्जनाओं पर, और, लेओकनान के आवेश पर भी-यों बोलते हुए कि अनर्गल बकवास है -वह हँसा।
    ज़ीने की सबसे ऊपरी सीढ़ी पर पुन: आ खड़ी हुई हेरोडिऑस जोर-जोर से चिल्ला पड़ी:
'' आपको नहीं मालूम, हुजूर! दरअसल उसने लोगों को उकसाया कि करों की अदायगी बंद कर दें!ÓÓ
    ''ऐसा है?ÓÓ उसने सबसे पूछा। चारों ओर से पुष्टि की हुँकार उठी; अन्यों की ताईद में एंटिपास ने अपनी आवाज भी मिला दी।
    वाइटेलियस को अंदेशा हुआ कि कहीं बंदी भाग निकलने में कामयाब न हो जाये; उसे एंटिपास का व्यवहार भी काफी कुछ शंकास्पद नज़र आया; सो, उसने दरवाजों पर, और, थोड़ी-थोड़ी दूरी से प्राचीरों के निकट, और प्रांगण ही के भीतर अपने खास पहरेदार तैनात कर दिये।
    आखिर अब, अपने ही याजकों संग, वह, अपने लिए निर्धारित कक्षों में आराम फरमाने जा पहुँचा। राजकीय-याजकों के लुभावने ओहदों के मसले पर मुँह खोल पिल पडऩे की बनिस्बत हर किसी ने प्रोकौंसल के समक्ष अपनी-अपनी भड़ास निकाली। वे शिकायतों और फरियादों को पेश करते-ही-करते उसे काफी संयमित रूप से घेरे रहे, लेकिन उसने बड़ी जल्दी ही उन्हें खारिज कर दिया।
    प्रोकांैसल के कक्षों से बाहर निकलते-निकलते जोनाथास की नजर, एक मेहराब तले, लंबा चोगा पहले, घने केश फैलाये किसी ईसेन के साथ चर्चालीन एंटिपास पर पड़ी। अब जोनाथास को अफसोस होने लगा कि उसने क्यों टेट्रार्ख के बचाव में दलील दी।
    एक बात ने हेरोड-एंटिपास के मन को अब तसल्ली पहुँचायी: वैयक्तिक रूप से अब वह लेओकानान की दुर्गति के लिए जिम्मेवार नहीं माना जा सकता।  वह उत्तरदायित्व रोमन लोगों ने अपने सिर उठा लिया है। कितनी राहत, वाह! दूर कहीं धीमे कदम प्रांगण नापते फैन्यूअल को लख, निकट बुला वाइटेलियस द्वारा तैनात पहरेदारों की ओर इशारा कर बोला:
    ''ये मुझसे ज्यादा बलवान हैं! मैं बंदी को नहीं छोड़ सकता! कारागार में उसके बंद पड़े रहने के लिए अब मंै जिम्मेवार नहीं हूँ।ÓÓ
    प्रांगण खाली था। सारे दास सो रहे थे। दिन डूब रहा था; क्षितिज पर आ छायी किसी गहरी गुलाबी आभा से जा झलकी छोटी वस्तु भी छायाचित्रों सी नजर आने लगी थी। मृत सागर के सुदूर कोने पर नमक-की-खदानों पर हो रहे उत्खननों को एंटिपास भलीभाँति चीन्ह सकता था, जबकि अरबों के तंबू अब नजरों से ओझल हो चले थे। चाँद के ऊपर आ उभरते, दिन भर बनी रही उत्तेजना का प्रभाव लोप हो गया, और अब शनै:शनै उसके हृदय में अमन की भावना ने घर बना लिया।
    हाल आ उभरी भभकती घटनाओंं से क्लांत फैन्यूअल भी हतोत्साह हो टेट्रार्ख के निकट ही खड़ा रहा। अपनी ठुड्डी सीने से टिकाया वह कुछ पलों मौन बना रहा। आखिर, एंटिपास के कानों अपने मन की बात गुपचुप बोला।
    महीने के आरंभ ही से, उसने कहा, हर सुबह पौ फटते वह आँखें गड़ा खगोल पर नजरें फिराता आ रहा है कि जब परस्यूस का नक्षत्र एकदम सिर पर होता है तब अगालाह मद्धा, और अलगोल तो प्राय: सारी चमक खोया हुआ होता है; मिरा-सीटस पूरी तरह लोप हो चुका होता है। उनकी रंगत के अध्ययन ने किसी अत्यंत महत्वपूर्ण शख्स की-मकाएरस की आज ही की रात्रि में-मृत्यु का अपशगुन उसके ज़ेहन में उतारा है।
    कौन हो सकता है? वाइटेलियस तो इस कदर सुरक्षित घेरे में है कि उंगली तक उसे नहीं छू सकती! लेओकनान को कोई नहीं मारेगा।
    ''तब तो मैं ही शिकार होऊँगा!ÓÓ टेट्रार्ख ने सोचा।
हो सकता है, अरब लौट आयें और मुझ पर कामयाबी हासिल करता हमला बोल दें! शायद, प्रोकौंसल पार्थियन्स से उसके संबंध का राज़ जान ले! प्रोकौंसल के काफिले में शामिल पादरियों की मार्गरक्षा करते आये अनेक लोगों को एंटिपास ने यों भाँपा कि- अपने वस्त्रों तले छुरे छिपाये-वे जेरूसलेम से भाड़े पर नियुक्त हत्यारे हैं। ज्योतिषी गणना बाबत फैन्यूअल के हुनर की महारत पर टेट्रार्ख को पूरा यकीन था।
    अचानक हेरोडिऑस का खयाल आया। क्यों न उसके साथ मशविरा किया जाये? उससे, निसंदेह, नफरत करता है; तथापि, वह उसमें दम भर सकती है; और फिर, उसके प्रति अपनी वितृष्णा के बावज़ूद, उस सम्मोहन-कि जिसके पाश में वह कभी घिरा रहा- के सारे बंधन अभी टूटे नहीं हैं।
    उसके कक्ष में पैर रखते, चट्टानी पत्थर-पॉरफीरी- के किसी कलश में प्रज्ज्वलित दालचीनी की तीक्ष्ण गंध उसकी साँसों आ समायी। वहाँ हवा, नानाभाँति पावडरों तथा उबटनों के इत्र एवं, बादलों समान धूपों और पंखों-सी महीन ज़रदोजि़यों की खुशबू से भरी थी।
    उसने फैन्युअॅल के इलहाम बाबत न अरबों और यहूदियों से अपने डर बाबत कुछ कहा। हेरोडिऑस पहले ही उसे कायर करार दे चुकी है। अपनी बात सिर्फ रोमनों ही तक महदूद रख यही दुखड़ा रोता रहा कि वाइटेलियस ने फौजी मंसूबों संबंधी अपनी किसी भी मंत्रणा में उसे भरोसेमंद न मान शामिल नहीं किया। उसने कहा कि लगता है प्रोकौंसल-एग्रिप्पा से अकसर मिलने जाते शख्स-कालिगुला का दोस्त है; फिर उसने अपने अंदेशे को व्यक्त किया: कहीं देशनिष्कासन न हो जाये; या फिर, गला ही न काट दिया जाये।
    इन दिनों, उसके प्रति किसी न किसी किस्म की तिरस्कारी आसक्ति से भरा सलीका अपनायी हुई हेरोडिऑस ने उसकी हिम्मत अफ्जाई की। कुछ पल बाद किसी छोटी-सी मंजूषा में से, ताइबोरिअस की आकृ ति से अलंकृत कोई अनोखा तावीज़ निकाल एंटिपास के हाथों थमा, बोली: इसको देख रोमन सैनिक निष्प्रभ हो जायेंगे, और, सारी इलज़ामी जुबानें थम जायेंगी।
    अत्यंत कृतज्ञ हुए एंटिपास ने पूछा तावीज उसे कैसे कहाँ मिला।
    ''यह मुझे प्रदत्त है,ÓÓ इतना भर ही उसका जवाब था।     
    उसी क्षण, सामने लटक रहे पर्दे को चीरती एक निर्वसन भुजा एंटिपास की नजर भेद गयी। वह किसी नवयौवना की-ऐसी कि पालीक्लिटस द्वारा उत्कीर्णित आइवरीत्कृति जैसी लावण्यमयी-भुजा होगी। थोड़ी बहुत बेतुकी हालाँकि उसीके साथ अत्यंत मोहक ढंग से मचलती वह दीवाल पर कुछ टटोलती तनिक भटकी, और फिर, दरवाजे के निकट लगी किसी खूँटी से कोई कुरती उतार हवा हो गयी।
    कक्ष की लंबाई चीरती कोई वयोवृद्ध परिचारिका पर्दा उठा बाहर चली गयी। टेट्रार्ख के मन में सहसा कोई स्मृति कौंधी।
    ''वह स्त्री तुम्हारी कोई दासी है?ÓÓ उसने पूछा।
    ''तुम्हें क्या मतलब?ÓÓ हेरोडिऑस ने तिरस्कार भरा जवाब दिया।
-तीन-
    विशाल दावतखाना मेहमानों से अट गया था। महल के इस खंड में किसी बेसिलिका (लंबे आयताकार हाल) समान तीन नेव (जहाज रूपी कक्ष) थे जो चंदन के ऐसे स्तंभों से पृथक-पृथक होंगे कि जिनके शिखर काँस्य मूर्तियों से सजे थे। खंड के दोनों सिरे दर्शक दीर्घाएँ थीं; और तीसरा सिरा कि जिसका अग्रभाग सोने की जरदोज़ी से अलंकृत होगा, वह-सुदूर सिरे निर्मित अत्यंत विशाल मेहराब के सामने था।
    दावतखाने की पूरी लंबाई नाप रहे प्रज्ज्वलित दीपदान मेजों के ऊपर-रंगबिरंगे प्यालों, पीतल की चमचमाती तश्तरियों, बर्फ के टुकड़ों, और मधुर अंगूरों के गुच्छों के अनंतर-आलोकित पुष्पकुंजों समान झलक रहे थे। लंबी-चौड़ी खिडकियों में से पड़़ोसी मकानों की छतों के ऊपर प्रदीप्त मशालों को देखा जा सकता था, क्योंकि इस रात एंटिपास ने मित्रों, नगर निवासियों, और, महल निकट आ पहुँचे हर किसी को दावत का न्योता दे रखा था।
    कुत्तों समान चौकन्ने दास फेल्ट-निर्मित पादुकाएँ पहने-पहने, तश्तरियाँ उठाये एक से दूसरे कोने सरकते जा रहे थे।
    प्रोकौंसल की मेज-सोने का मुलम्मा चढ़ी बालकनी तले -गूलर की लकड़ी के बने चबूतरे पर स्थित थी। मण्डप में इतस्तत: लटक रहीं भव्य टेपिस्ट्रियों से किसी किस्म की विविक्ति का माहौल महसूस हो रहा था।
    विशाल कक्ष के सम्मुख एक, और, मण्डप के दोनों पाश्र्व पर एक-एक, ऐसी तीन आइवरी काऊचों पर वाइटेलियस, उसका पुत्र आउलॅस, और एंंटिपास आराम से बैठे थे। दरवाजे के निक ट, बाँयी ओर वाइटेलियस, दाँयी ओर ऑउलस, तथा एंटिपास टेट्रार्ख बीच में, अपनी-अपनी काऊचों पर आसीन थे।
    रंगीन कशीदाकारियों और चमचमाती सजावटों से प्राय: पूर्णत: आच्छादित जिसका टेक्सचर होगा ऐसा कोई लंबा-चौड़ा भारी-भरकम स्याह चोगा पहने एंटिपास की दाढ़ी किसी पंखे समान फैली थी; उसके केशों पर नीला पावडर छिड़का हुआ था; और, सिर पर बेशकीमती रत्नों से जड़ा मुकुट फँसा था। वाइटेलियस अभी तक भी पीताभ फीता धारा हुआ था; उसका ओहदा किसी लीनन चोगे पर तिर्यक-क्रास बना रहे किसी प्रतीक से प्रगट हो रहा था।
    रजत-कशीदाकारी किये हुए अपने बैंजनी चोगे की आस्तीनें पीठ पर कसे हुए ऑउलस के गुच्छेदार घुंघराले केश बड़े सलीके से पंक्तिबद्ध थे; गले में गोल गोल सफेद मणियों की- स्त्रियों द्वारा वापरी जाती, वैसी-माला चमक रही थी। उसके निकट, किसी कम्बल पर, एक बना-ठना छैला पलथी मार दुबका बैठा था; उसके चेहरे पर अनवरत मुस्कान खिली हुई थी। रसोईघरों में कहीं वह ऑउलस की नजर इस कदर आ चढ़ा कि उसके प्रति वह प्रगाढ़ आकर्षण से जा भरा। उसने बच्चे को अपने परिचरों में शामिल कर लिया, हालाँकि वह अपने इस आश्रित का काल्डियाई नाम कभी नहीं याद रख पाया, सो, उसे 'एशियाटिकÓ कह कर ही पुकारता। बीच-बीच वह उचक कर दावत की मेजों के इधर-उधर मटकता तब उसकी पुराकालीन हरकतें अतिथियों का मन बहलातीं।
    टेट्रार्ख के मण्डप के एक सिरे विन्यस्त मेजों पर उसी के पुरोहित और अधिकारी, जेरूसलेम से तशरीफ लाये कुछ एक लोग, तथा, यूनानी नगरों के कई एक ज्यादा ही महत्वपूर्ण व्यक्ति बैठे थे। प्रोकौंसल के बायीं बाजू रखी मेज पर पटवारियों संग मार्सेलस, टेट्रार्ख के कतिपय मित्रगण; और, काना, प्टोलेमाईस तथा जेतिचों से तशरीफ लाये अनेक नुमाइंदे आसीन थे। अन्य मेजों पर लिबान के पर्वतारोही तथा हेरोड की सेना के कई एक फौजी; दर्जन भर थ्राशियाई, एक यूनानी और दो जर्मन; इनके अतिरिक्त, शिकारी और गड़रिये, पालमायरा का सुल्तान, और ईजीआँगेबर के सैलानी विराजमान थे। प्रत्येक मेहमान के समक्ष-उँगलियाँ साफ करने के लिए-एक वृत्ताकार रोटी रखी थी। उनके बैठते ही, किसी गिद्ध के पंजों की उत्कंठा भरे हुए हाथ जैतून, पिश्ता, बादाम आदि मेवों पर झपट पड़े। हर चेहरा प्रसन्न था; हरेक ने सिर पर फूलों का मुकुट सजाया था, सिर्फ फेरिज़ीज़ को छोड़, जिन्होंने हार फूल पहनना-रोमन ऐयाशी और दुर्गुण मान- नकारा हुआ था। परिचारकों ने जब उन पर गेलबर्नम और लोबान का छिड़काव किया तब वे थरथराए, क्योंकि उन्होंने उनके इस्तेमाल को, मन्दिर के अनुष्ठान के अतिरिक्त, पूरी सख्ती से वर्जित करार दिया हुआ था।
एंटिपास ने गौर किया कि ऑउलस ने भुजाओं के नीचे यों खुजाला मानो गर्मी, या फिर हँसी-मजाकों की आवाजों से चिढ़ रहा हो। झट उठ निकट जा उसने उसी किस्म के बेशकीमती मल्हम को बुलवाने का वचन दिया कि क्लिओपेट्रा जिसका इस्तेमाल करती थी।
ताइबेरियस की सेना का हाल पहुँचा कोई कप्तान सरपट दौड़-कहीं कोई अप्रत्याशित हंगामा न आ खड़ा हो जाये, इस $खतरे के  मद्देनजर- टेट्रार्ख के पीछे, बॉडीगार्ड की तरह जा तैनात हो गया। हालाँकि उसका ध्यान कभी प्रोकौंसिल की गतिविधियों तो कभी पड़ोसियों की गपशपों में जा रमा।
माहौल के अनुकूल, प्राय: सारी चर्चाएँ लेओकनान और उसी के जैसे अन्य व्यक्तियों पर जमी रहीं।
''ऐसा कुछ सुना गयाÓÓ, कोई एक अतिथि बोला,''कि सायमन ऑफ गिट्टा ने उसके पाप ज्वालाओं में भस्म कर दिये हैं। और, एक शख्स क्या नाम उसका जीसस...........ÓÓ
    ''अरे वो तो उनमें सबसे ज्यादा खराब है। एलिएजार ने टोंका,''कम्बख्त बड़ा ढोंगी है।ÓÓ
यह सुन टेट्रार्ख के मण्डप से सटी मेज से उछल कोई शख्स राह निकाल, एलिएजार के आसन तक जा पहुँचा। उसका चेहरा, प्राय: अपने सूती वस्त्र ही सा निष्प्रभ होगा, तथापि उसने फेरिजियो को, साहस बनाये रख, जवाब दिया: ''यह बिल्कुल झूठ है ! जीसस ने चमत्कारों को अंजाम दिया है।ÓÓ
एंटिपास ने जीसस कृत कतिपय तथाकथित चमत्कारों का प्रदर्शन देखने की, अर्से से संजोयी, अभिलाषा जाहिर की। ''उसे साथ क्यों नहीं ले आये ÓÓ, उसने आगंतुक संवादी - जो अभी तक वहीं खड़ा होगा- से कहा। ''खैर, उसके बारे में जो कुछ जानते हो - बताओÓÓ, उसने उसे हुकुम दिया।
तब अजनबी -नाम जेकब -बोला, ''खुद मैंने केपरनाम जा स्वामी से अपनी बेहद बीमार पड़ी लड़की को चंगा करने की याचना की। स्वामी ने यह कहते जवाब दिया: घर लौट जाओ, वह निरोग हो गयी! वाकई जब घर पहुँचा, दहलीज पर इंतजार करती बेटी को देखा, कि जो अपनी खटिया से गजर के तीन के घंटे ठुकने के क्षण ही उठ खड़ी हो गयी थी कि जिस क्षण मैंने जीसस से प्रार्थना की होगी।ÓÓ
फेरिजि़यो ने कतिपय भेदभरी चतुराइयों और शक्तिशाली जड़ी-बूटियों के जरिये मरीज का चंगा होना संभव माना। माकाएरस में भी पायी जाती किसी अद्भुत वनस्पति-बारास-का जिक्र हुआ कि जिसकी शक्ति ऐसी कि उपभोक्ता को किसी भी रोग के  आक्रमण के समक्ष अभेद्य बना दे, लेकिन रोगी को देखे या छुए बगैर चंगा करना तो, बेशक असंभव ही  माना जायेगा, एकदम नामुमकिन, तथापि ऐसा तभी चरितार्थ हो सकता होगा कि जब वो शख्स-जीसस-किसी शैतानी प्रेत का आह्वान करना जानता हो।
एंटिपास के मित्रों और गेलिली से आये मेहमानों ने विवेकशील मुद्राएँ बना गरदन लहराते कहा:''तब तो जाहिर है उसे किन्हीं शैतानों से बल मिलता है।ÓÓ
उनकी, और, पुरोहितों की मेजों के दरमियान खड़ा जेकब एक साथ उद्धत भी शालीन भी-ऐसा-मौन बनाया रहा।
कतिपय जुबानें चिल्ला पड़ीं ,''उसकी ताकत को हमारे समक्ष पुष्ट  करो!ÓÓ
पुजारियों की मेज पर जा झुके जेकब ने अटक-अटक, थोड़ा खँखार, काफी कुछ दबी जुबान-मानो अपने ही कहे पर विस्मित-यों बोला:
''आप, शायद अभी तक नावाकिफ होंगे; बहरहाल, बतला दूँ: वह मसीहा है!ÓÓ
पुजारियों ने बगलें झाँकी, तभी वाइटेलियस ने उसका मायना तलब किया। उसका दुभाषिया पल दो पल ठिठका, फिर तर्जुमा कर बोला कि मसीहा धरती पर निकट भविष्य में जन्म लेने वाले का नाम है जो सारे आशीर्वचनों का आनंददायक, और, धरती के सारे मनुष्यों पर उनका प्रभुत्व कायम करने वाला है। कतिपय लोगों के मतानुसार दो मसीहाओं का प्रादुर्भाव होगा; उत्तर के असुर: गॉग और मैगॉग : एक को परास्त कर देंगे, लेकिन दूसरे मसीहा द्वारा प्रिंस ऑव इविल (बुराई के राजा) का नाश होगा; यह भी कहा गया कि मानवजाति के  मुक्तिदाता के किसी भी क्षण जन्मने की प्रतीक्षा सदियों से हो रही है।
अब, पुजारी-गण धीमे स्वर परस्पर बातें करने लगे। जेकब के जानिब गरदन घुमा एलिएज़ार ने कहा कि सदैव ही से माना गया कि डेविड का पुत्र ही मसीहा होगा, किसी सुतार का नहीं; जबकि नाज़रीन ने इस बात का प्रत्याख्यान किया। और फिर, दावेदार के खिलाफ ज्यादा ही मजबूत तर्क के अवांतर ऐसी प्रतिश्रुति प्रस्तुत की गयी कि मसीहा के पहले इलियास प्रगट होगा।
''इलियास तो आ गया!ÓÓ जेकब ने कहा।
''इलियास! इलियास!ÓÓ दावतखाने के सिरे से सिरे तक यही शब्द गँूजता गया।
सारे लोगों के तसव्वुर में कोई चेहरा कौंधा- एक बूढ़ा शख्स, सिर पर विशालकाय कौओं की उड़ान, बिजली की चमक से झलक रही किसी वेदि के समक्ष खड़ा हुआ, तेज धारा में जा बहेे बुतपरस्त पुजारियों की शक्लें उद्घाटित करता हुआ; जबकि गैलरियों में बैठी स्त्रियों के ख्यालों में सेरेप्टा की विधवा का रूप उभरा।
तब जेकब ने कहा, कि वह इलियास को जानता है; कि उसने उसे देखा है; और; कि यहाँ एकत्र अनेक अतिथियों ने भी उसे देखा है!
''उसका नाम?ÓÓ चारों ओर से पुकार सुनाई दी।
''लेओक नान!ÓÓ
एंटिपास अपनी कुर्सी पर- यों मानो किसी तरह का कोई धक्का मारा गया हो- पीठ के बल जा गिरा। अपने आसनों से उठ खड़े सारे सेड्यूज़ी जेकब की ओर लपके। एलिएजार इतनी ऊँची आवाज बोला कि सभी सुन लें। कुछ क्षण बीते कोलाहल के थमते उसने अपना लबादा कंधों पर व्यवस्थित कर, किसी मुंसिफ का तेवर अख्तियार की हुई जुबान खोल जेकब से सवाल पर सवाल करना शुरू किया।
''प्रॉफेट तो मर चुकाÓÓ- वह बोला।
फुसफुसाहटों ने उसे टोका। कई लोगों का ऐसा ख्याल रहा कि इलियास मरा नहीं, सिर्फ अदृश्य हुआ है।
एलिएजार ने व्यवधान उत्पन्न कर रहे लोगों को डाँटते हुए अपना वक्तव्य जारी रखा।
''अब क्या तू सोचता है कि वह पुनर्जीवित हो गया?ÓÓ
''ऐसा सोचने में क्या हर्ज है?ÓÓ जेकब ने उत्तर दिया।
सेड्यूजि़यों ने कंधे बिचकाये। अपनी छोटी-छोटी आँखें फाड़े जोनाथास ने, खूब जोर लगा, मसखरी हँसी बिखेरी। इससे ज्यादा ऊलजलूल क्या होगा कि मानवीय देह में अनादि अनंत जीवन होने के  क्रमश :