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Tuesday 21 Nov 2017

हेरोडिऑस (2)

विरासत का धनी है। जेनिक्यूलम से समुद्र तक जाता राजमार्ग उन्हीं के नाम से ख्यात है। कई एक अन्वेषक और कौंसल इसी महान कुटुम्ब से उपजे; और अब इस अतिप्रतिष्ठित मेहमान गौरवशाली ल्यूशियस पर नजर डालें तो सभी लोगों का यह कर्तव्य होगा कि क्लिटि पर विजय हासिल किए इस महायोद्धा का सम्मान करें, कि किशोर ऑउलस का यह पिता अपने प्रदेश लौट रहा है, क्योंकि पूरब तो हमेशा देवताओं ही का देश रहा आया है। बेइंतिहा चिकनी चुपड़ी खुशामद से भरे ये वचन लेटिन में व्यक्त किये गये कि जिन्हें वाइटेलियस ने भावशून्य बने-बने ही ग्रहण किया।
उसने जवाब दिया, कि हेरोड देश का अत्यंत प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्ति रहा आया है; कि अथेनियाइयों ने उसे ही ओलंपिक खेलों के संचालन  का जिम्मा सौंपा; कि उसने ही आगस्टस की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए मंदिरों की स्थापना की थी; अत्यंत धीर, मेधावी, अद्भुत वह शख्स सभी सम्राटों के प्रति व$फादार रहा है।
इस क्षण, कांत्स मुकुट धारे दो संगमरमरी-स्तंभों के बीच, रजत कलई चढ़े पात्रों में विन्यस्त सुवासित-धूपदान उठाये खोजाओं और स्त्रियों के किसी झुण्ड से घिरी- किसी शहजादी का तेवर ली हुई- हेरोडिऑस, हौले हौले निकट आती नजर आयी।
प्रोकौंसल तीन कदम आगे चल उससे मिलने बढ़ा। हेरोडिऑस ने अपना सिर नमा उसका अभिवादन किया।
''बड़ा सौभाग्य,ÓÓ उसके मुँह उद्गार निकले,''कि ताइबेरिअस का दुश्मन एग्रिप्पा अब कभी सिर उठाने की जुर्रत नहीं करेगा।ÓÓ
वाइटेलियस उसके संकेत को नहीं समझ पाया, लेकिन उसे वह खतरनाक स्त्री लगी। एंटिपास तत्क्षण बोल पड़ा वह सम्राट के लिए सबकुछ करने क ो तैयार है।
''चाहे जिसको चाहे जितना नुकसान पहुँचाकर भी?ÓÓ वाइटेलियस ने सारगर्भी मुद्रा बनाते हुए पूछ लिया।
उसने पार्थियाइयों के राजा के आदमियों को बंदी बना लिया था, फिर भी सम्राट ने उस पर ज्यादा कुछ गौर नहीं किया, क्योंकि मंत्रणा के दौरान उपस्थित रहे आये एंटिपास ने, नजरों ऊपर उठने के इरादे, आगे हो खबरें भेज दी थी। उस क्षण से उसमें सम्राट के प्रति घोर नफरत जा भरी, और तभी से उनको सहयोग- सामग्री पहुँचाने में वह विलंब भी करने लगा।
प्रोकौंसल की आशंका का जवाब देने के प्रयास के अवांतर बगलें झाँकता टेट्रार्ख लडख़ड़ा गया तब ऑउलस हँस पड़ा और बोला:''घबराओ मत। मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा!ÓÓ
प्रोकौंसल सर खुजलाता इधर उधर यूँ देखता गया मानो इस फब्ती को उसने जरा न सुना हो। पिता की समृद्धि, किसी न किसी तरह, पुत्र के भ्रष्ट दबदबे पर टिकी थी कि जिसके जरिये यह संभव था कि एंटिपास प्रोकौंसल को अच्छा खासा फायदा पहुँचाये यद्यपि उसकी ओर डाली जा रही नजरें उद्धत और वैरी थीं।
उसी क्षण दरवाजों के निकट कोई नया ही कोलाहल आ उभरा। पादरियों के परिधान धारे लोगों को अपने ऊपर बिठाये सफेद खच्चरों का एक झुण्ड प्रांगण में आ घुसा। ये सैड्ज्यूज़ी और फेरिजी लोग माकएरस में एक जैसी ही : एक दल शासकीय याजक बनाये जाने की, तो दूसरा अपनी वही नियुक्ति बनाये रखने की: माँग लेकर दाखिल हुए। रोम के भी और टेट्रार्ख के भी दुश्मन रहे आये इन लोगों - विशेषतया फेरिजियों- के चेहरे भी स्याह थे। अपने-अपने घुटनों के नीचे तक लटके हुए बगैर बाँह के उनके कुरतों के लहराते घेरे, भीड़  के बीच से अपनी राह निकालते क्षण, बेहद अड़चन उपजा रहे थे; उनके साफे ढीले पड़ उनकी भौं तक आ खिसके थे कि जिन पर बंधी चमड़े की पट्टियों पर उकेरी लिखावट की पंक्तियाँ नजर आ रही थी।
ठीक उसी क्षण, हरावल के सैनिक आ पहुँचे। उनकी चमकती ढालों पर, धूल से बचाने के लिए कपड़े के $िगला$फ चढ़े हुए थे। इन सिपाहियों के पीछे, प्रोकौंसल का लेफ्टिनेंट, मार्सेलस, अपने पीछे अपनी-अपनी बगलों में काष्ट-पट्टियाँ दबाये पटवारियों को साथ ले चला आ रहा था।
एंटिपास इर्द-गिर्द आ खड़े प्रमुख व्यक्तियों का परिचय वाइटेलिस को देने लगा: तोलमाई, कांथेरा, स्चोन, अमोनिअस ऑव एलेक्जेंड्रिया(जो एंटिपास के लिए एस्फाल्ट लाता), लड़ाकुओं की टुकडिय़ों का कप्तान न्नामन, और बेबिलोनयाई जासिम।
तभी वाइटेलियस की नजर मैन्यूअस पर पड़ी।
''इधर देखो, वह कौन है?ÓÓ उसने पूछा।
सारगर्भी मुद्रा बना टेट्रार्ख ने बतलाया कि मैन्यूअस जल्लाद है। अब उसने सैडज्यूज़ी की जानिब वाइटेलियस का ध्यान खींचा।
छोटी कद काठी का, यूनानी भाषी ज़ोनाथास, मजबूत कदम बढ़ाते आगे आ आग्रह करने लगा कि महामहिम जेरूसलेम पधार हमें अनुग्रहीत करें। वाइटेलियस ने जवाब दिया वह, शायद निकट भविष्य में ही, जेरूसलेम पहुँचेगा।
टेढ़ी नाक और लंबी ढाढ़ी वाले एलिएज़ार ने फेरिजि़यो की ओर से नागरिक प्रशासकों द्वारा अधिग्रहित अंतोनिआ-के-दुर्ग में स्थापित राजपुरोहित (हाई प्रीस्ट)की पीठ के लिए माँग पेश की।
अब गेलिलियाई आगे आये और उन्होंने पोंतियस पाइलेत की भत्र्सना की। संयोगवश, उन्होंने कहा, समारिआ के निकट स्थित किसी गुफा में, किंग डेविड के सुनहरे पात्रों को खोजता कोई पागल जा घुसा; नतीजतन पोंतियस पाइलेत ने उस इलाके के अनेक निवासियों के गले  कटवा दिये। उत्तेजना की रौ में सारे गैलिलियाई एक साथ बोल उठे, कि जिन सब की आवाजों के ऊपर मैन्यूअस की चिल्लाहट सुनाई दी। वाइटेलियस ने वादा किया कि अपराधियों को सजा दी जायेगी।
तत्पश्चात्, विशाल दरवाजों के सामने, कि जहाँ सिपाही अपनी ढालें लटकाते वहाँ-एकाएक तुमुल कोलाहल आ उभरा! ढालों के गिलाफ उतार लिये गए थे; प्रत्येक ढाल के मध्यवर्ती उभाड़ या मूठ पर, सीज़र का उत्कीर्णित मुखड़ा दीख पड़ा। यहूदियों के लिए यह मूर्तिपूजा का साक्ष्य मालूम दिया। लाल पीले होते एंटिपास ने उन्हें लंबा चौड़ा भाषण पिलाया, जबकि, स्तंभों की परछाई में कुछ ऊँचा आसन ग्रहण किया हुआ वाइटेलियस सैनिकों के उन्माद से भौंचक था। ताइबेरियस ने, उसने सोचा, इन लोगों में से चार सौ को निष्कासित कर सारडिनिया भेज ठीक ही किया था। इस क्षण तो यहूदी इतने सख्त नाराज़ नजर आये कि उसे ढालों को हटा देने का आदेश देना पड़ा।
तब बेशुमार लोगों ने प्रोकौंसल को आ घेरा; वे कतिपय बेजा कानूनों को निरस्त करवाने की, थोड़ी-बहुत रियायत की, या किसी अनुदान की याचना करने लगे। उन्होंने एक-दूसरे को आगे पीछे धकेलते हुए अपने कपड़े चीर फाड़ डाले; अत: अंतत: उन्हें खदेड़ भगाने लंबी-लंबी लाठियाँ उठाये कुछ-एक गुलाम धुआँधार हाथ चला उन पर पिल पड़े। दरवाजों के निकट जो होंगे वे तो भाग कर सड़क पर उतर आये; दूसरे उनके स्थानों पर अंदर आ घुसे; इस तरह, प्रवेश की हद में, एक-दूसरे को दबाते लोगों की बाहर जाती भीतर आती धाराएँ बह चली।
वाइटेलियस ने इतनी विशाल भीड़ के इक_ा होने की कैफियत माँगी। एंटिपास ने बतलाया कि वे उसके जन्मदिन की दावत में आमंत्रित किये गये है; फिर उसने कतिपय आदमियों की ओर इशारा किया कि जो परकोटे पर टिके झुके तरह-तरह के पकवानों से, फलों से, सब्जियों से, हिरणों से, और तीतर से भरे टोकने उठाये हुये थे; अंगूरों के गुच्छे, तरबूजों-खरबूजों के और अनारों के ढेर भी दिखाई दिए। दृश्य देख, मुँह में भरे पानी के वश हुआ ऑउलस प्रांगण छोड़ रसोईघरों की ओर जा लपका क्योंकि नाना भाँति के पकवान भकोसने का, कि जो बाद के दिनों संसार भर का-स्तंभित करता-शौक जा बना है, उसका लोभ संवरण न कर पाया।
किसी छोटे से तहखाने की दहलीज पार करते वाइटेलियस की नजरें दीवार पर-कवचों से मेल खाती-किन्हीं चीजों पर पड़ी। उन पर जा टिकी उसकी दिलचस्पी ने उसे, किले के भूमिगत प्रकोष्ठों के निरीक्षण के लिए उकसाया। महल की चट्टानी नींव के रूप में तराशे ये प्रकोष्ठ-सममित दूरियों पर खड़े स्तंभों के बीच-विशाल तिजोरियों की सूरत अख़्ितयार किये हुए थे। खूब खुली पहली तिजोरी में पुराने कवच; तो दूसरी में, पंखों के गुच्छों में से बाहर आ निकलती नाकों वाले बरछे-ही-बरछे ठसाठस भरे थे। तीसरे प्रकोष्ठ में, नाजुक-नाजुक सरकण्डों से निर्मित, किसी न किसी तरह की  टेपेस्ट्रियाँ लंबवत् रखी थीं। चौथा शमशीरों से अटा पड़ा था। पाँचवे के भीतर शिरस्त्राणों की कतारें नजर आयीं कि जिनके शिखर $खूँखार सर्पों समान दीख पड़े। छठा प्रकोष्ठ केवल खाली तरकशों ही से अटा पड़ा था; सातवाँ, युद्धों में पैरों की सुरक्षा के कवचों से; आठवाँ, कंगनों और बाजूबंदों से; शेष प्रकोष्ठों के निरीक्षण के अवांतर लोहे के चिमटे और काँटे, निसैनियाँ, रस्सियाँ, गुलैलें भी, और ऊँटों के गले लटकायी जाती घंटियाँ उजागर हुई; फिर, जैसे-जैसे वे चट्टानी नींव में गहरे उतरे, यह जाहिर हो गया कि समूचा अंबार प्रकोष्ठों ही प्रकोष्ठों का बेहद मजबूत छत्ता है, और यह भी कि जिन्हें देख पाये उनके नीचे कई और हंै।
तीन हिजड़ों द्वारा मशालों से रोशन किये जा रहे इन अंधेरे कक्षों में, वाइटेलियस, उसका दुभाषिया, और प्रमुख-पटवारी सिसेन्ना घूमते गये।
गहरे अंधकार में बर्बरों द्वारा अन्वेषित विकराल शस्त्र नजर आये: नुकीली कीलें लगी कुल्हाडिय़ाँ, जहरीले बरछे; मगर के जबड़ों-दाँतों समान चिमटियाँ, कुल मिला यूँ कहें कि टेट्रार्ख ने अपने महल में युद्ध की इतनी सामग्री एकत्र कर रखी होगी कि जो करीब चालीस हजार फौजियों के लिए पर्याप्त हो।
अपने दुश्मनों के, एकजुट हो हमला बोल देने की किसी संभावना के मद्देनजर, उसने इन हथियारों का संग्रह किया था। लेकिन उसने सोचा कहीं प्रोकौंसल ऐसा न मान बैठे या ऐसा अडिय़ल ख्याल उसके मन में घर न बना ले कि ये सारे अस्त्र-शस्त्र रोमनों पर धावा करने के इरादे जमा किये गये होंगे; अत: उसने वाइटेलियस के अवलोकन में आये सारे दृश्य की फौरी कैफियत पेश कर दी।
इनमें की काफी-कुछ सामग्री कहीं से भी उसकी नहीं है, वह बोला:कतिपय हथियार तो इस बस्ती को डाकू-लुटेरों के, खासकर अरबों के हमलों से बचाने के लिए जरूरी रहे आये। प्रकोष्ठों में एकत्रित अधिकांश सामग्री उसके पिता की थी कि जिसे उसने अनछुआ ही रखा रहने दिया। बोलते-बोलते वह सरपट कदम बढ़ा, गलियारों में चलते प्रोकौंसल के आगे जा निकला। अब वह पूरे दल के वहाँ पहुँचते, दीवाल से सट आ खड़े हो बोलता ही गया; उसने अपने हाथ कमर पर रख ऐसे पसारे थे कि जिससे उसका लंबा-चौड़ा चोगा अपने पीछे की दीवार का बड़ा सा भाग आच्छादित कर दे। लेकिन उसके सिर के ऊपर किसी दरवाजे का छोटा सा हिस्सा दिखाई दे गया। वाइटेलियस ने उसे तत्क्षण भाँप लिया, और यह जानने का आग्रह करते पूछ बैठा कि उसमें क्या छिपाया गया है।
टेट्रार्ख ने बताया कि दरवाजा इतना कस कर जकड़ा हुआ है कि बेबीलोनियाई जासिम ही उसे खोल पाये तो खोल पाये।
''उसे बुलवाओ,ÓÓ दबंग आवाज में आदेश हुआ।
किसी गुलाम को उसे बुलाने भेजा गया जबकि शेष दल उसका इंतजार करता वहीं ठहरा रहा।
अर्सा पहले, युफ्रेटस के तटों से, पाँच सौ घुड़सवारों के संग, पूर्वी सरहद की सुरक्षा के लिए जासिम का पिता आ जुटा था। राज्य के बँटवारे के बाद, जासिम कुछ वक्त फिलिप के साथ रहा तत्पश्चात एंटिपास की सेवा में आ लगा।
पल बीते, वह, प्रकोष्ठों के बीच से आता नजर आया; उसके कंधे पर खासा बड़ा धनुष और हाथ में कोई चाबुक थी। उसके बलिष्ठ गाँठदार पैरों पर रंगबिरंगी रस्सियाँ कसी हुई थीं; बिना बाँह के कुरते के भीतर से उसकी महाकाय भुजाएँ बाहर निकली हुई थीं; और कोई फरदार टोपी उसका सिर ढाँके थी। उसकी ठुड्डी पर खूब घनी दाढ़ी उगी हुई थी।
 यों लगा कि वह, दोभाषिया जो बोला उसे तत्क्षण नहीं समझ पाया। लेकिन जब वाइटेलियस ने एंटिपास की ओर सारगर्भी नजर घुमायी-न-घुमायी कि उसने प्रोकौंसल का आदेश बेबीलोनियाई को समझा दिया। जासिम ने तत्क्षण दरवाजे पर दोनों हाथ जमा उसे पुरजोर धकेला कि वह धीरे-धीरे घूमता शनै:-शनै: नजरों से ओझल होता दीवाल से जा सटा।
कंदरा की गहराइयों से गर्म हवा का झोंका बाहर बहा। कोई घूमता रास्ता नीचे उतरते सहसा मुड़ गया। उस पर चलती पूरी टोली, किसी न किसी किस्म की- अन्य भूगर्भी प्रकोष्ठों से अपेक्षाकृत बड़ी-किसी तराशी हुई कंदरा की दहलीज तक, पल बीते न बीते, जा पहुँची।
इस कक्ष के पिछवाड़े, कोई मेहराबदार खिड़की- महल की एक बाजू की प्रतिरक्षक किसी सीधी चट्टान पर जा-खुल रही थी। अत्यंत सुगंधित फूलों वाली कोई वल्लरी, नीचे छत से टकरा-टक रा ऐंठी-मरोड़़ी होती-होती भी पुरजोर पल्लवित हो रही थी। झरझर बहते किसी सोते की ध्वनि कानों पड़ रही थी। इस स्थान पर कई सारे- करीब सौ एक -खूबसूरत सफेद घोड़े थे। वे अपने मुँह ऊँचे उठे किसी तख्ते पर रख जौ चर रहे थे। उनके अयाल गहरे नीले रंगे हुए थे; और खुर घास के बुने किन्हीं आवरणों में लिपटे थे; और कानों बीच के उनके केश किसी टोपी समान उभरे हुए थे। चुपचाप चर रहे वे अपनी पूँछें हौले-हौले इधर उधर लहराते जा रहे थे। प्रोकौंसल ने उन्हें मौन सराहना के साथ ध्यान से देखा।
वे निसंदेह अद्भुत प्राणी थे; सर्पों-से लचीले, पक्षियों-से हलके । अपने सवार के चलाए तीर की दिशा, फौरन लपक पडऩे का और दुश्मन के किसी झुण्ड बीच घुस जवानों को नीचे गिरा उन पर दाँत गड़ाते टूट पडऩे का वे प्रशिक्षण पाये हुए थे। चट्टानी राहों पर भी उनकी दौड़ विश्वसनीय थी; चौड़ी-चौड़ी गहरी खाइयों को वे निडर छलांग जाते; लंबे-लंबे मैदानों की राह एक ही दिन में अथक नाप लेने को तत्पर वे अपने सवार के आदेश पर पलक झपकते ठहर जाते।
जैसे ही जासिम निकट पहुँचा वे- गड़रिये को घेरती भेड़ों समान- उसके चारों ओर फुदक आये; और, अपनी चिकनी हृष्टपुष्ट गरदनें आगे निकाल टकटकी लगा उसकी ओर- जिज्ञासु बच्चों समान-देखने लगे। आदतवश उसके मुँह निकली कर्कश चीख सुन वे भड़क उठे; उछले, कूदे, पिछले पैरों जा खड़े हुए; अपने 'कारावासÓ पर अधीर वे दौड़ पडऩे को लालायित हो उठे।
    ये खूबसूरत पशु कहीं इस हद वाइटेलियस की नजर न चढ़ जायें कि वह उन्हें अपने साथ ले जाये- इस अंदेशे के तहत एंटिपास ने उन्हें, घेराबंदी के क्षणों पशुओं को अस्थायी तौर पर बसाने के इरादे विशेषतया निर्मित इस जगह बंद कर दिया था।
    ''इतना तंग घेरा इनके लिए एकदम अनुचित है,ÓÓ वाइटेलियस बोल पड़ा, ''और फिर, यों यहाँ रखे-रखे हम उनसे हाथ धो बैठ सकते हैं। सिसेन्ना ठीक से गिन इनकी फेहरिस्त बनाओ।ÓÓ
    प्रमुख-पटवारी ने अपने पहनावे के घेरे में से एक तख्ती निकाली, घोड़ों को गिना, और संख्या को ध्यान से दर्ज किया।
    राजस्व- मण्डलियों के कारिंदों के स्वभाव ही के अनंतर राज्यपालों को भ्रष्ट करना घुला हुआ रहा आया ताकि प्रदेशों की लूटपाट आसानी से की जा सके। उनमें सिसेन्ना अत्यंत समृद्ध कारिन्दा था, कि जो शिकंजे-सी अंगुलियों और लगातार झपकती पलकों के साथ हर कहीं नजर आ जाता।
    कुछ वक्त बीते पूरा दल राजमहल लौटा। फर्श के पत्थरों बीच भारी-भारी, गोल-गोल कांस्य ढक्कन महल के कुण्डों को ढके हुए थे। वाइटेलियस ने भाँप लिया कि उनमें से एक शेष से बड़ा है;  अपने पैरों थपथपाने पर उसमें अन्योंं से भिन्न गुंजन उभरी। उसने एक-एक कर हरएक को थपथपाया, फिर किसी जगह ठहर कई बार थपथपा चिल्ला पड़ा:
    ''मैंने ढँूढ निकाला! हेरोड का दफनाया खजाना मुझे मिल गया!ÓÓ
    छिपा या गड़ा हुआ खजाना खोजना रोमनों का अच्छा खासा उन्माद रहा आया।
    टेट्रार्ख हलफ उठा बोल पड़ा उस जगह कोई खजाना नहीं छिपा है।
    ''फिर वहाँ क्या छिपाया गया है?ÓÓ प्रोकौंसल ने पूछा।
    ''कुछ नहीं-बस-एक बंदी।ÓÓ
    ''उसे मुझे दिखाओ!ÓÓ
    टेट्रार्ख पल भर झिझका, कहीं यहूदी-जन उसका भेद न जान लें! उसकी आनाकानी से वाइटेलियस विचलित हुआ।
    ''ढक्कन तोड़ दो!ÓÓ वह अपने सैनिकों पर चीख पड़ा। मैन्यूअस ने आदेश सुना, और कुल्हाड़ी उठाये किसी सिपाही को आगे बढ़ता देख आशंका से जा भरा कि ये जवान कहीं लेओकनान का सर कलम न कर बैठे। उसने, पहले ही प्रहार के बाद सिपाही का हाथ थाम ढक्कन और फर्श के बीच की दरार में किसी न किसी किस्म का एक हँसिया फँसा अपनी लंबी-लंबी हालाँकि दुबली-पतली भुजाओं से खूब ताकत लगा आहिस्ता-आहिस्ता ढक्कन उठा पल बीते न बीते उसे फर्शियों पर चित उलटा दिया। दर्शकों ने वृद्ध आदमी की सराहना करती हर्षध्वनि उभारी।
    काँसे के ढक्कन के नीचे उसी की माप का, लकड़ी का जालीदार चौखट था। मुक्के के एक प्रहार ने उसे यों झुला दिया, कि नीचे, गहरे गड्ढे - यूँ कहें कि किसी असीम विवर-का मुख दीख पड़ा, कि जिसके भीतर घुमावदार सीढिय़ों का जीना चक्कर लगाता ही लगाता अंधकार में जा ओझल हो रहा था। कंदरा के भीतर देखने पर उसकी गहराइयों में कोई घूमिल और भयानक आकार नजर आया।
    वह, धरती पर लेटा, कोई मानव रूप था। सिर के बालों की लटें, ऊँट-के-बाल से बने चोगे से ढंके उसके कंधों पर लटक रही थीं। हौले-हौले वह अपने पैरों खड़ा हुआ। दीवार में जड़ी किसी जाली से उसका सिर छू गया; इधर-उधर घूमते-घूमते, यदा-कदा, अपनी कालकोठरी के अंधेरों में वह ओझल हो जाता।
    रोमनों के भव्य शिरस्त्राण धूप-रश्मियों में बड़ी शान से चमक उठे, और उनकी तलवारों की चमकीली मूठों से सुनहरी किरणें चिलकने लगीं। उनके प्रांगणों से उड़े फाख्ते बेशुमार भीड़ के ऊपर आकाश में जा मण्डराने लगे। यह वह पल होता जब मैन्यूअॅस नियम से उन्हें दाना डालने जाता। लेकिन इस क्षण वह वाइटेलियस के निकट झुके टेट्रार्ख से सट दुबका खड़ा था। गैलिलियाइयों, पुजारियों, और सिपाहियों का झुण्ड उनके पीछे तैनात था; किसी कष्टसाध्य पूर्वाभास-क्या मालूम क्या हो-की बाट जोहते वे मौन खड़े थे।
    गड्ढे में से, बेहद सनसनीखेज, यद्यपि खूब गहरा कोई आत्र्तनाद गूँज उठा।
    महल के सुदूरस्थ कोने पर खड़ी हेरोडिऑस ने उसे सुना। किसी अ-बाध्य हालाँकि भयावह सम्मोहन-वश वह भीड़ में से राह निकाल मैन्यूअॅस तक जा पहुँच उसके कंधे पर हाथ धर नीचे झुक सुनने लगी।
    धरती की गहराइयों में से गूँजता स्वर पुन: उभरा।
    ''धिक्कार तुम्हें, सैडज़ूसियों और फेरिजि़यों! तुम्हारी आवाजें झाँझ-मजीरों की टुनटुन समान हैं! अहंकार से फूल कर कुप्पा हुए जाते ओ ज़हरीले साँपों!ÓÓ
    लेऑकनान की आवाज चीन्ह ली गयी। उसके नाम की फुसफुसाहट भीड़ में सरसरा गयी। दूर खड़े दर्शक खुले विवर के नज़दीक आने मचले।
    ''धिक्कार तुम्हें ओ लोगों! जुड़ाह के प्रति विश्वासघातियों और एफै्रम की ऊर्वर घाटियों में रहते आ रहे तथा मदिरा की महक में लडख़ड़ा रहे- शराबखोरों, तुम्हें धिक्कार! ...
''क्यों न पानी के बुलबुलों समान; बल्कि रेत में जा घुसते घोंघों समान; कभी उजाला न देखे गर्भपाती-भ्रूण समान लोप हो जाओ! .........
    ''और तुम भी, मोआब, तुम भी! सरू के बीच, गोरैया समान; कंदराओं में, जंगली खरगोश समान छिप जाओ! गढ़ी के फाटक-छिलकों ही के  चूर होने से, बल्कि और भी ज्यादा ही आसानी से- चकनाचूर होंगे; दीवारें धसक जायेंगी; नगर धू-धू करते जलेंगे; फिर भी ईश्वर का प्रकोप नहीं थमेगा! वह तुम्हारी देहों को तुम्हारे ही रक्त में-रंगरेज की कड़ाही में रंगे जाते ऊन समान - नहला देगा। वह तुम्हें-किसी न किसी किस्म के आरे से - चीर फाड़ेगा; वह तुम्हारी देहों के टुकड़ों को पर्वत-शिखरों से दूर फेंक बिखेर देगा!ÓÓ
    वह किस बादशाह का जिक्र कर रहा है? क्या वह वाइटेलियस है? ऐसे विध्वंस को तो सिर्फ रोमन ही अंजाम दे सके थे। लोग चिल्ला पड़े: ''बहुत हुआ! बहुत हुआ! मुँह बंद करो उसका!ÓÓ
    लेकिन बंदी ऊँची आवाज बोलता गया:
    ''उनकी माँओं की लाशों निकट तुम्हारी छोटी-छोटी लाशें जले नगरों की राख के ढेरों ऊपर खुद-ब-खुद घिसटती चली आयेंगी। रात घिरते कई लोग प्रच्छन्न स्थानों से- तलवार से काट दिये जाने का जो$िखम उठा- ध्वंसावशेषों में खाने का कोई टुकड़ा खोजते बाहर आ निकलेंगे। लोमडिय़ाँ तुम्हारी हड्डियाँ उन सार्वजनिक स्थलों (जहाँ साँझ पड़े पादरीगण एकत्र होने के अभ्यस्त रहे आये) से उठाने चली आयेंगी। जैंटायलों के इशारे पर तेरी स्त्रियाँ सिसकियाँ भरना रोक देने के लिए बाध्य हो गाने बजाने को मजबूर होंगी; और भारी-भारी बोझ लादे तेरे बहादुर-से-बहादुर लड़के अपनी पीठें झुकाना सीख जायेंगे।ÓÓ
    श्रोताओं को निर्वासन के दिन, और बीते दिनों की सारी विपत्तियाँ और त्रासद घटनाएँ याद आयीं। ये लफ्ज़ पुरातन प्राफेटों द्वारा उच्चारे वीरगाथा-गायन समान थे। बंदी ने उन्हें यों दहाड़ा मानों आकाश से वज्रपात हुआ हो।
    अब उसकी आवाज इतनी मधुर और समस्वर हो गयी मानों कोई गीत गा रहा हो। उसने संसार की- पाप और दुख से-मुक्ति के; स्वर्ग की महिमा के; मिट्टी की जगह सुनहरी धरती के; रेगिस्थान की भूमि पर गुलाब ही गुलाब निखर आने के  वचन बोले: ''आज जिसकी कीमत चाँदी के साठ सिक्कों के बराबर है वह चीज एक ओबल  ही से कम में मिलेगी। चट्टानों में से दूध की नदियाँ बहेंगी; अंगूरों का रस निकालते कोल्हूओं बीच लोग तृप्त जीवन जीते सोयेंगे; लोग, तेरे-ओ डेविड के पुत्र- तेरे पाँवों साष्टंाग गिरे होंगे, तेरा ही राज्य अनादि अनंंत होगा!ÓÓ
    टेट्रार्ख एकाएक गड्ढे के निकट से पीछे हटा;  डेविड के पुत्र के अस्तित्व का उल्लेख उसे अपने ही को धमकाती हुई आवाज-सी लगी।
    तब लेओकनान ने उसके खिलाफ भत्र्सना की बौछार की कि वह संपूर्ण इलाके पर सर्वाधिकारी सत्ता हासिल करने की अभिलाषा का साहस कर रहा है।
    ''अनादि-अनंत ईश्वर के सिवाय दूसरा कोई भगवान नहीं है,ÓÓ वह चीखा; और फिर उसने, अधमी  क्रमश :