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Monday 20 Nov 2017

एहतिजाज का पोस्टर

 

 निदा नवाज
एनिकट नूरानी नर्सिंग कालेज एक्सचेंज कोलोनी, पुलवामा.192301
कश्मीर  
मो.09797831595
एहतिजाज का पोस्टर    
(दुनिया भर के शरणार्थियों के नाम)
तुम्हारे घरों पर बोल दिया है
पागल कुत्तों ने धावा
कहीं तानाशाहों के रूप में
तो कहीं आईएसआईएस के
क्रूर आतंकियों के रूप में
जिनकी पीठ थपथपा रहे हैं
साम्राज्यवाद के सफेद भेडिय़े
और कट्टरवाद के कायर कौए
एक नाटकीय षड्यंत्र
कुत्तों, कौओं और भेडिय़ों के बीच
मानवता को लहूलुहान करने का
प्रागैतिहासिक पाखंडी गुफाओं में
मानव को वापस धकेलने का
अंधविश्वास के गहरे अँधेरे में
फेंक देने का
तुम सब निकल पड़े हो
अपने बचे-खुचे परिवारों सहित
सांस भर जीवन
और आँख भर सपनों को तलाशते
अपने सिरों और कांधों पर
बच्चों भर भविष्य  
और आशा भर पोटलियाँ लिए
सफर भर शंकाएं और सागर भर
डर के साथ
अतीत-वसंत और वर्तमान-पतझड़ की
यादों के कारवाँ को हांकते
छांव भर आकाश
और बैठने भर ज़मीन की तलाश में
तुम्हारे साथ ही निकला था ऐलान कुर्दी भी
अपने अब्बू-अम्मी और
बड़े भाई के साथ
अपने नन्हे पांव से फलांगता
सीरिया और तुर्की की कंटीली सीमाएं
तीन वर्षीय ऐलान कुर्दी
जो बीच सागर में डूब मर मर गया
अपनी अम्मी और बड़े भाई के साथ
लाखों अनाम शरणार्थियों के साथ
मानवता के चेहरे पर
एक नासूर बनकर
जिसका औंधे मुंह पड़ा मृत शरीर  
और नन्हे जूतों के घिसे तलवे
अल्हड़ लहरों और रेतीले साहिल पर
हम सब के खि़लाफ दर्ज कर गये  
एहतिजाज का एक मुखर पोस्टर

दरकिनार नहीं कर सकते
हम दरकिनार नहीं कर सकते
अपनी संवेदनाओं के धरातल पर
उमड़ आया लहूलुहान विद्रोह
हम दरकिनार नहीं कर सकते
अपनी ही कोशिकाओं में
लाल गरम रक्त की सूरत
उभर आया गुस्सा
हम दरकिनार नहीं कर सकते
आग में दहकता यह वर्तमान
हमारे सपने हैं घुटन भरे
और हमारा परिचय है विकृत   
हमारे दिलों में है  
निरंतर मृत्यु का एहसास
और आँखों में
प्यासे कबूतरों का शोर
हम हर सुबह निकालते हैं  
ऐसे तैसे अपने बिस्तरों से
अपने ही शव
और दिन भर उन्हें  
अपने कंधों पर उठाये
मापते रहते हैं
अपने युद्ध क्षेत्र बने
स्वर्ग पर बिखरी एक एक पीड़ा
भेडिय़ों की लाल होती
आँखों की गहराइयों में
हम दरकिनार नहीं कर सकते
अपने ही भीतर पड़ाव डाले
उस सांझ समय के मुसाफिऱ पक्षी को
जो अपनी पोटली में समेट लाया है  
पूरे दहकते दिन का रेगिस्तानी दर्द