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Thursday 23 Nov 2017

सफेद लोग

 

टीकम शेखावत
सोनइन्दर, पुणे
मो. 9765404095
सफेद लोग
वे काफी सामाजिक
और
प्रगतिशील होते हैं
जातिवाद में उनका विश्वास नहीं होता!
उनका अपना समाज होता है
उनके यहां शादी ब्याह
उन्हीं की बिरादरी में होते हैं
धर्म, प्रांत व जाति भेद
से दूर
सन ऑफ सफेदी
वेड्स
डॉटर ऑफ सफेदी
यही वाक़ई में समाजवाद है

सेक्युलर
 
मैं दो बातें हरदम  मानता रहा
एक यह कि
सूरज सेक्युलर है
मेरा मतलब धर्म से नहीं,
बल्कि हर इंसान को एक नजर से देखने से है।
दूसरी बात
अंधविश्वास विज्ञान के सामने
धराशायी है
लेकिन
जब मैं किसी सड़क से गुजरता हूँ,
कइयों को आलीशान कार में देखता हूँ
कइयों को मेरी तरह दुपहिये संग
या फिर बस या रेल में
तो कहीं सड़क किनारे देखता हूँ।
जैसे जूतों के अस्पताल में
सर्जरी करते मोची काका
कहीं भीख मांगते बच्चे तो कहींबूढ़े बाबा
तब मुझे लगता है
शायद सूरज ने चुपके से
रोशनी देने में धांधली की है
तब तो फिर पक्का
 सूरज सेक्युलर नहीं है!!
अगर वो सेक्युलर होता तो
हर रात का एक सवेरा होता
हर गम और आंसू का
पग फेरा होता
और
अगर सच में वो सेक्युलर होता
तो फिर शब्दकोष में
किस्मत शब्द न होता।

बात
तुम तो कहती थी
बहुत ताकत होती है शब्दों में
मन को कहां
किसी के भी सामने
कहीं भी
हूबहू बयान किया जा सकता है
 
लेकिन मैं इंतजार करता रहा
यह सोचकर कि
तुम कुछ कहोगी
तुम दिल की बात बताओगी
 
खैर
अच्छा हुआ
जो तुमने
उस दिन मुस्करा दिया
मुझे
मानों मंजिल मिल गई
कुहासे पर
कोई जानी-पहचानी आकृति खिल गई
 
नहीं तो
मैं
करता ही रहता इंतजार
यह सोचकर
कि कब होगी तुमसे बात
और
उन्हीं बातों में
होगा
प्रतीक्षित संवाद