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Wednesday 22 Nov 2017

जुलाई अंक की प्रस्तावना में पाठक मंच द्वारा आयोजित इटार में हुए साहित्यिक सम्मेलन की रपट पढ़कर लगा कि काव्य मंच आज भी साहित्य से जनसाधारण को जोडऩे का सशक्त माध्यम है।

 

शिवकुमार अर्चन, फोन- 0755-2427550, मो. 09425371874

जुलाई अंक की प्रस्तावना में पाठक मंच द्वारा आयोजित इटार में हुए साहित्यिक सम्मेलन की रपट पढ़कर लगा कि काव्य मंच आज भी साहित्य से जनसाधारण को जोडऩे का सशक्त माध्यम है। मनोरंजन और व्यावसायिकता के त्याग से उनकी विश्वसनीयता लौटाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ के पाठक मंचों की सक्रियता स्पृहणीय है। मध्यप्रदेश में पाठक मंचों की स्थिति दयनीय और मृतप्राय है।
उपसंहार में शमशेर की कविता के माध्यम से समय की नब्ज पर हाथ रखकर सार्थक बात कही है। अंक की तीनों कहानियां ठीक ठाक हैं। विशेषकर रजनी शर्मा की कहानी 'मुर्गा लड़ाईÓ आदिवासी जनजीवन और छत्तीसगढ़ी बोली बानी में रची-बसी बेहतरीन आंचलिक कहानी है। 'सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धारÓ के यशस्वी कवि अरुण कमल पर लिखा शोध आलेख और मेहनत की मांग करता है।