Monthly Magzine
Tuesday 21 Nov 2017

ट्रंप का बयान


सर्वमित्रा सुरजन
अमरीका में राष्टï्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बनने के प्रबल दावेदार डोनॉल्ड ट्रंप ने अपने प्रचार के दौरान बयान देते हुए कैलिफोर्निया नरसंहार के बाद अमरीका में मुसलमानों के प्रवेश पर 'पूरी तरह से रोक लगानेÓ की मांग की है। ट्रंप ने कहा कि जब तक अमरीकी प्रतिनिधि यह पूरी तरह से न समझ लें कि दुनिया में क्या हो रहा, तब तक मुसलमानों के अमरीका में दाखिल होने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देना चाहिए। इस बयान की जितनी निंदा की जाए कम है। उनका यह विवादास्पद बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही अमरीका के राष्टï्रपति बराक ओबामा ने देश में प्रवेश के लिए धार्मिक जांचों को खारिज करने की बात कही थी। हालांकि कैलिफोर्निया में हुई अंधाधुंध गोलीबारी और कई लोगों की मौत से चिंतित बराक ओबामा ने अमरीकी जनता को भरोसा दिलाया कि इस्लामिक स्टेट को नेस्तनाबूद करने में कोई कसर नहींछोड़ेंगे। यह सही है कि इस वक्त पूरी दुनिया आईएस के बढ़ते खतरे से गहरी चिंता में है। जितनी कीमती अमरीकी नागरिकों की जान है, सीरिया, इराक, ईरान, अफगानिस्तान, भारत, पाकिस्तान के लोगों की जान भी उतनी ही कीमती है। फर्क इतना ही है कि अमरीका अपनी हर बात को, यहां तक कि भावनाओं को भी बढ़ा-चढ़ा कर दिखाता है। याद करें किस तरह एनीमेटेड अमरीकी फिल्मों में खिलौनों की भावनाओं का महत्त्व भी बढ़ाकर दिखाया जाता है, जबकि दुनिया के लाखों-करोड़ों बच्चे खिलौने तो दूर भोजन और शिक्षा के अधिकार से भी वंचित हैं। इन भूखे-नंगे, कुपोषण और युद्ध की विभीषिका के शिकार बच्चों की भावनाओं की फिक्र ट्रंप जैसे लोगों को शायद ही कभी होती है। डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार इस तरह का भड़काऊ बयान नहींदिया है। वे पहले से मुस्लिमों के प्रति अपनी दुर्भावना प्रकट करते रहे हैं। इस बार कुछ खुलकर उन्होंने अपने मन की बात कही। ट्रंप के इस बयान की स्वाभाविक ही आलोचना हुई। रिपब्लिकन पार्टी में ही राष्टï्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए संघर्ष कर रहे जेब बुश ने डोनाल्ड ट्रंप को मानसिक रूप से परेशान बताया। पूर्व उप राष्टï्रपति डिक चेनी ने कहा कि यह टिप्पणी हर उस मूल्य के खिलाफ है जिसमें अमरीका विश्वास करता है। वहीं उनकी प्रतिद्वंदी लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यह बेहद गंभीर और खतरनाक है। ट्रंप की इस टिप्पणी की आलोचना व्हाइट हाउस के अलावा मुसलमान नेताओं ने भी की। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अमरीकी राष्टï्रपति चुनाव के दौरान चल रही बयानबाजी के कारण शरणार्थियों के लिए चलाए जा रहे राहत एवं पुनर्वास को नुकसान पहुंच सकता है। इस चेतावनी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि इस वक्त पश्चिमी पूंजीवादी शक्तियों की करतूतों और आतंकवाद के कारण अफ्रीका व मध्यपूर्व  एशिया के लाखों लोग अपनी जमीनों से उजड़कर दूसरे देशों में पनाह लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप आतंकवाद और इस्लाम का सीधा संबंध जोड़ते हुए शायद विश्व की ऐसी विडंबनाओं को देख नहींपाते। या हमें यह मान लेना चाहिए कि वे भी अधिकतर अमरीकियों की तरह आत्मकेन्द्रित हैं, जिन्हें अपने सुख-दुख से परे बाकी चीजें नजर नहींआती। ट्रंप की अतिरेक भरी सोच चुनावों से पहले बार-बार जाहिर हो रही है। अगर अमरीकी जनता उन्हें अपना राष्ट्रपति बनाती है तो पिछड़े, विकासशील देशों को वे किस निगाह से देखेंगे, इसका अनुमान लगाना कठिन नहींहै। फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप के लिए इतना ही कहा जा सकता है कि अगर उन्हें अपनी और अपने देश की सुरक्षा की इतनी ही परवाह है तो वे अमरीका में आने और बाहर जाने के सभी रास्ते बंद कर दें। कछुए की तरह खोल में सिमट जाएं या शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर घुसा लें। अपना सामान बेचने और दूसरे देशों के प्राकृतिक संसाधनों को हड़पने के लिए निकलना भी बंद कर दें।  ठ्ठ