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Tuesday 21 Nov 2017

प्रतिलिपि सम्मान समारोह


 लखनऊ में 28 नवम्बर 2015  को प्रतिलिपि डॉट कॉम की ओर से आयोजित प्रतिलिपि कथा सम्मान और प्रतिलिपि कविता सम्मान में साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पढऩे के नये माध्यम और साहित्यकार की भूमिका विषय पर गोष्ठी का आयोजन भी प्रतिलिपि की ओर से किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति ने की। वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में शिवमूर्ति जी ने इन्टरनेट पर साहित्य की दुनिया का स्वागत करते हुए  कहा कि यदि साम्प्रदायिकता पर चिंता व्यक्त करती कहानी पुरस्कृत हो रही है तो पाठक गंभीर हैं और सामाजिक सरोकार की कहानियां समाज पसंद करता है। परिचर्चा के दौरान वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र यादव ने भारतीय भाषा के साहित्य को एक नए मंच देने के लिए प्रतिलिपि का स्वागत किया। वरिष्ठ कथाकार और तद्भव के सम्पादक अखिलेश ने इस नये माध्यम की फंडिंग और फिल्टरेशन की बात की। रचनाओं की स्तरीयता के लिए रिव्यूर्स मंडल की जरूरत पर बल दिया। नरेश सक्सेना जी ने साहित्य के नये तकनीकी माध्यमों से डरने की बजाय इन्हें समय की जरूरत बताते हुए इसकी सबलताओं पर तथ्यों सहित रौशनी डाली। कवि अनिल त्रिपाठी ने विषय प्रवर्तन किया और सर्वेन्द्र विक्रम ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम का सफल संचालन कथाकार रजनी गुप्त ने किया।
                                    प्रस्तुति - डॉ राकेश कुमार