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Monday 15 Oct 2018

जीवन में उतरो कविता

 

समयलाल विवेक

जीवन में उतरो कविता

कविता
महज तुम
कविता में ही
मत ठहरो
जीवन में उतरो

कविता विरोधी
समय है
चलो तुम हरदम
कवि के साथ

समय की
मुठभेड़ में  
बनेगी तभी
कोई बात

तब हम
हंसते-हंसते
सह लेंगें
हर आघात

कविता
तुम ही तो
कवि की
ताकत हो

कविता में ही
मत ठहरो

साथ चलो तुम
हर पल जैसे
रोशनी के साथ
चलती परछाईं

जिंदगी
प्राणवायु
के साथ

चल अब साथी

चल अब साथी
बाकी का यह
जीवन थोड़ा
अधिक ही जी लें

  मुक्ति के लिए
 संकल्पित हों
 संघर्ष पथ पर
  बढ़  चलें
        
व्याधि मुक्त हो
सुखद स्वस्थ हो
यह जग  जीवन