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Thursday 23 Nov 2017

सहिष्णुता का यशोगान

 

समयलाल विवेक
मु.पो. पिपरिया (कवर्धा )
जिला-कबीरधाम( छ.ग.)
मो .7898408911
 सहिष्णुता का यशोगान

(दिवंगत कलाधर्मियों का स्मरण करते हुए)
बेहतरीन दुनिया का
सपना देखते और
जोखिम उठाते
बनें नहीं
बच्चों की
घृणा के पात्र
बचते- बचाते
कितने साथी
बीत गए
असमय ही
तमाम
सुधी जनों को
पीछे छोड़

उन्हीं की तरह
निश्चित ही
किसी दिन
हम भी
गुजर जायेंगें

लेकिन
जब तलक हैं
निहायत
घटिया विचारों से
लड़ते-भिड़ते
ताकत भर
करते रहेंगे
दुनिया में व्याप्त
सहिष्णुता का यशोगान

  हमारा यह सपना

उजाले की आस में
अंधेरे में बैठे हम
सदियों से
अंधेरे को
पोनी की तरह
धुनकी से धुन रहे
और गुन रहे......
क्यों आखिर
अंधेरे के चेहरे पर
नहीं उबकता
एक भी सफेद दाग
पुराना रंगीन
कपड़े जैसा
नहीं उधड़ता उसका रंग

कोई हमें
देख नहीं रहा फिलहाल

अंधेरे के खिलाफ
उच्चासन पर
बैठे हैं चंद लोग बेशक
गहराता आ रहा अंधेरा
वहां से ही

हमारा यह सपना
नि:संदेह सच होगा
किसी दिन
सिर पर
रोशनी का घड़ा रक्खे
सूरज आएगा और हमें
जी भर के नहलायेगा