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Friday 21 Sep 2018

हरीश वाढेर की कविता पर चर्चा

 

हरीश वाढेर की कविता पर चर्चा  
जन संस्कृति मंच दुर्ग भिलाई इकाई द्वारा 1 नवम्बर की संध्या कवि हरीश वाढेर के कविता संग्रह जो पहचाना नहीं गया पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। आरंभ में श्री प्रभात त्रिपाठी द्वारा कवि की प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया गया।  कवि नासिर अहमद सिकंदर ने बताया कि संग्रह की अधिकतर कविताएं मानवीय संवेदना के उस धरातल पर खड़ी है जहाँ मनुष्यता का पक्ष सबसे ज्यादा मजबूत है। कवि अंजन कुमार ने कहा कि संग्रह में प्रकृति, रिश्ते-नाते, प्रेम और विभिन्न अनुभूतियों से संबंधित कई छोटी-बड़ी कविताएँ हैं जो लगातार असुंदर होते जा रहे समय में सौंदर्य की तलाश करती, रचती और अपने जड़ों से जीवन रस को संचित करती कविताएँ हैं। लंबी कविता माया में माया पूँजी के मायावी बाजार के यथार्थ की जटिलताओं को परत दर परत खोलने की कोशिश करती और लगातार उसकी कू्रर और अमानवीय होती जा रही स्थितियों को उजागर करती कविता है। प्रो. सियाराम शर्मा ने कहा कि इस विज्ञापन की दुनिया में यह कवि आत्म प्रचार से दूर है। कबीर की तरह उनका व्यक्तित्व तथा जीवन सहज, सरल था। कवि घनश्याम त्रिपाठी ने कहा कि कवि अमूर्त भावों को मूर्त करने में सक्षम है ज्ञात शब्दों से नये शब्दों का निर्माण करने की क्षमता है। लंबी कविता माया में माया में बड़बोलापन या अतिरंजना नहीं है, कवि की चिंता और उसका तनाव हर जगह व्याप्त है। कार्यक्रम के विशेष अतिथि कवि मृत्युंजय ने कहा कि एक रूपीकरण के खिलाफ  पूँजी का डंका था पर दुनिया आज एक रूप कर दी गई है। कवि सभ्यता की समीक्षा करता है। संग्रह की कविताओं में इस दुनिया की गहरी समीक्षा है कविता में टेक्नोलॉजी का नहीं नीयत का विरोध है।मुख्य अतिथि प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि हरीश वाढेर निश्छल व्यक्ति थे। उन्हें पर पीड़ा की समझ थी। कविता जोड़-तोड़ के छद्म से बाहर है। अच्छी कविता की खूबी है कि न तो इसे सारांश किया जा सकता है न इसकी अंतिम समीक्षा की जा सकती है। अच्छा कवि सबसे अलग है तो वहीं सबके साथ है। अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. जयप्रकाष ने कहा कि हरीश वाढेर कवि के साथ संवेदनशील कथाकार भी थे। वे चाक्षुष संवेदना के कवि थे। गोष्ठी में वासुकी प्रसाद उन्मश्र, अनिता करडेकर ने भी संग्रह पर अपने विचार व्यक्त किये। तथा जितेन्द्र वाढेर और सुनीता वर्मा ने अपने संस्मरण से कवि को याद किया। कार्यक्रम संचालन अशोक तिवारी ने किया।