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Monday 19 Feb 2018

अक्षरपर्व निरंतर मिल रहा है, आभार। सितम्बर अंक में चंद्रसेन विराट की कविता बहुत सुंदर है।

अक्षरपर्व निरंतर मिल रहा है, आभार। सितम्बर अंक में चंद्रसेन विराट की कविता बहुत सुंदर है। उन्हें बधाई। नागार्जुन के काव्य की समीक्षा बहुत ज्ञानवद्र्धक है। महेन्द्र भल्ला जी के संस्मरण बड़े मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उनका चरित्र सचमुच प्रशंसनीय था। अक्षरपर्व के सभी अंक सदा नवीन चिंतन देते हैं। आपको साधुवाद।
    प्रो.गिरीशचंद्र चौधरी, भारतेंदु भवन, चौखम्भा, वाराणसी।