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Tuesday 16 Oct 2018

रचना वार्षिकी भीष्म साहनी विशेषांक का एक-एक पन्ना पढ़ गया, प्रस्तावना से लेकर उपसंहार तक।

रचना वार्षिकी भीष्म साहनी विशेषांक का एक-एक पन्ना पढ़ गया, प्रस्तावना से लेकर उपसंहार तक। लगभग हर लेख में भीष्मजी के लेखन और उनके व्यक्तित्व को शिद्दत से याद किया गया है। लेकिन सूर्यबाला जी के लेख को मैं इस यज्ञ की पूर्णाहुति कहूंगा। अंक के सभी लेखक और अक्षर पर्व टीम बधाई की पात्र है। यह सचमुच संग्रहणीय अंक है। जो लेख किसी कारणवश इस अंक में समाहित नहींहो पाए हैं, वे आगे के अंकों में पढऩे मिलेंगे, ऐसी उम्मीद है।
    नीतिपाल अत्रि, फरीदाबाद।