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Thursday 18 Jan 2018

अक्षर पर्व पत्रिका लगातार उन्नति करते हुए अनवार्य हो रही है पाठकों व लेखकों दोनों के लिए। और. ललित जी के प्रस्तावना की तो बात ही अलग है।

रामनाथ शिवेन्द्र
अक्षर घर, पूरब मोहाल, रावर्ट्सगंज, सोनभद्र 231216 उ.प्र.
मो.07376900866

अक्षर पर्व पत्रिका लगातार उन्नति करते हुए अनवार्य हो रही है पाठकों व लेखकों दोनों के लिए। और. ललित जी के प्रस्तावना की तो बात ही अलग है। मुझे जान पता है कि उनके आलेख किसी विशेष संग्रह के निमित्त हैं वर्ना इतना शोधपूर्ण तथा अनिवार्य क्यों लिखा जाता... किसे फुर्सत है कि वो आ. भागवत रावत को याद करे...वह भी इस तरह से...
ललित जी के वर्णनात्मक शैली में...ही बोलूं तो....
'...वे कविता नहीं लिखते, वे बातचीत करते हैं, वे सुनने वालों को आतंकित नहीं करते...Ó
यह बहुत बुरी बात है, यही बात किसी कवि को कवि बनाती है.. कवि बनना और शब्दों के जनतंत्र में कवि बने रहना यही महत्वपूर्ण है। कवि कर्म के लिए बड़ा या छोटा का कोई मतलब नहीं।
आप इसी तरह से अक्षरपर्व के लिए समर्पित रहें यही कामना है।