Monthly Magzine
Sunday 21 Oct 2018

सितम्बर अंक में कहानी के प्रकाशनार्थ साधुवाद। सुंदर अंक है। कविता, कहानी, संपादकीय टोटली धॉंसू अंक।

 

सर्वमित्रा जी,
सितम्बर अंक में कहानी के प्रकाशनार्थ साधुवाद। सुंदर अंक है। कविता, कहानी, संपादकीय टोटली धॉंसू अंक।
कहानी कस्तूरी के लिये देश भर से लोगों के बधाई के फोन आ रहे हैं। दरअसल बधाई की पात्र आप हैं। जिन्होंने समय की नब्ज़ को पहचााना है, वक्त की दस्तक सुन सकने में सक्षम आपके कान हैं। लीक से हटकर लिखी कथा को लोग साईंस फिक्शन कहकर परे सरका देते हैं। कूवत नहीं होती हैं बोल्ड स्टेप लेने की। तभी हिंदी साहित्य हाशिये पर है, और अंग्रेजीदॉं एम बी ए किए हुए लेखक ऑन लाईन शॉपिंग पर धड़ाधड़ बिक रहे हैं। जिसे हम पढ़ नहीं सकते, उसे लोग खरीद रहे हैं, सैंकड़ों रुपए देकर। साहित्य को आगे बढ़ाने और पीछे धकेलने दोनों में संपादक का अहम रोल है। आपने इस कहानी को छापकर युवा पाठकों का ध्यान पत्रिका की ओर खींचा है, आपको सारा श्रेय देती हूँ। सारे छत्तीसगढ़ी पाठक खुश हुए ये जानकर कि वाकई ये मुर्दा मेंढ़क भिलाई में गिरा था,,,,।
 सधन्यवाद
 पूनम मिश्रा