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Tuesday 21 Nov 2017

अक्षर पर्व अगस्त-2015 अंक देखकर महान शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी के गाए हुए गीत की पंक्ति- \'\'मिले सुर मेरा तुम्हारा फिर सुर बने हमाराÓÓ याद आ गई, जो राष्ट्रीय एकता हेतु भारत सरकार द्वारा बनाए एक विज्ञापन में थी।

कुशेश्वर
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अक्षर पर्व अगस्त-2015 अंक देखकर महान शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी के गाए हुए गीत की पंक्ति- ''मिले सुर मेरा तुम्हारा फिर सुर बने हमाराÓÓ याद आ गई, जो राष्ट्रीय एकता हेतु भारत सरकार द्वारा बनाए एक विज्ञापन में थी। तो इस बार आरंभ में ललित सुरजन और अंत में सर्वमित्रा सुरजन दोनों ने विचारों के ऐसे 'स्वरÓ दिए हैं कि साधुवाद तो देना ही होगा।
ललित जी 'हिन्दी साहित्य का नया इतिहासÓ लिखने हेतु आपने ऐसी नींव डाल दी है, जैसे आजकल मकान बनाते समय पहले पिलर डाल देते हैं (खड़ी कर देते हैं) और फिर बाद में ईंट जोडऩे का काम करते हैं। सूची तो मार्गदर्शन का अद्भुत कार्य करेगी। मेरा तो आग्रह है कि आप ही इस ओर अग्रसर हों, बहुत ही सुंदर होगा।
नारी शक्ति सदैव ही परिवार एवं समाज को संभालती रही है 'सेल्फीवाला समाजÓ के अंतर्गत आपने जिस प्रकार भारतीय महिला खिलाडिय़ों (सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, मैरी काम और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर गई भारतीय महिला हॉकी खिलाडिय़ों की सफलता की ओर ध्यान आकृष्ट किया है तथा इरा सिंघल के संघर्ष का जिक्र किया है, वह काबिले तारीफ है। आपने ठीक ही लिखा है कि हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, पर प्रतिभाओं का दमन किया जाता है। कविताओं में राजन की 'सेल्फी समयÓ और 'दिनकर चौराहाÓ अच्छी लगी तथा तबस्सुम की एक कविता 'कब्रगाहों की वीरान सल्तनतÓ ने काफी झंकृत किया। राजकुमार कुंभज का प्रश्न समीचीन है।