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Saturday 18 Nov 2017

अगस्त अंक के कलात्मक आवरण पृष्ठ पर गायों का हर्षित समुदाय नीर भरे मेघों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता सा लग रहा है।

 

युगेश शर्मा,

11 सौम्या एन्क्लेव एक्सटेंशन,

सियाराम कालोनी, चूना भट्टी,

भोपाल। मो.9407278965

अगस्त अंक के कलात्मक आवरण पृष्ठ पर गायों का हर्षित समुदाय नीर भरे मेघों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता सा लग रहा है। प्रत्येक अंक में ललितजी के गहन-गंभीर आलेख के साथ प्रस्तावना में साक्षात्कार होता है। उनकी विशद अध्ययनशीलता और साहित्य की विधाओं और समसामयिक सृजन धाराओं के साथ उनका जुड़ाव इस स्तंभ के माध्यम से हमारे सामने आता है। मैंने भोपाल के एक साहित्यिक कार्यक्रम में उनकी चिंतन प्रखरता को महसूसा है। उपन्यासविधा के गौरव पुरुष भीष्म साहनी के बारे में पूर्व अंक में काफी उपयोगी सामग्री आपने दी है।  श्री श्याम कश्यप का संस्मरण प्रकाशित कर आपने इस क्रम को उनकी जन्म शताब्दी के प्रसंग में जारी रखा है, यह सुखद बात है। डा.सुधेश का लेख भी काफी कुछ जोड़ता है। डा.वेदप्रकाश अमिताभ ने भीष्मजी के कथापक्ष के एक अनछुए पृष्ठ को खोलने का काम किया है। अक्षरपर्व का यह प्रयास भीष्म साहनी के रचनाकार को हर कोण से समझाने का अवसर प्रदान करेगा। आलोचक प्रवर डा.विजय बहादुर सिंह के आलेख यादें: मंचीय लोकप्रिय कविता में अपने दीर्घकालीन अनुभवों को उन्होंने खंगाला है। राजकुमार कुंभज ने कविवर निराला का जो विवेचन किया है, वह विचारणीय है। निराला तो वास्तव में मानवतावादी कवि थे। संग्रह की कविताएं और कहानियां पठनीय हैं। अनुपम मिश्र के स्मरण में अपनापन और ताजगी है। आपका उपसंहार भी समय की पदचाप को ठीक-ठीक सुनते हुए चलता है, बधाई।