Monthly Magzine
Friday 25 May 2018

जुलाई-15 का अक्षर पर्व मिला। सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया \'नागार्जुन का कविता कर्म चर्चा में योगदानÓ ने। अजित कुमार ने नागार्जुन की कविता का मूलपाठ देकर अच्छा किया

चन्द्रसेन विराट, 121, बैकुंठधाम कॉलोनी
आनंद बाजार के पीछे, इंदौर-452018 (म.प्र.)

जुलाई-15 का अक्षर पर्व मिला। सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया 'नागार्जुन का कविता कर्म चर्चा में योगदानÓ ने। अजित कुमार ने नागार्जुन की कविता का मूलपाठ देकर अच्छा किया। हर कोई अब फिर से इसका पठन कर मूल्यांकन कर सकेगा। पूरी बात तो साफ तब होगी जब विजय बहादुर सिंह की इस पर टिप्पणी प्राप्त हो जाएगी। शायद यह अगले अंक में आ जाए। यह अजीत जी का काव्य विवेक ही कहा जाएगा कि उन्होंने नागार्जुन सरीखे बड़े कवि की पंक्तियों पर सोच समझकर आपत्ति की। वरना गलती को नजरअंदाज करके छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं- विद्वान पाठक ही नहीं, आलोचक भी। अतिरंजना के मोह में बाबा नागार्जुन कोयल को ठूंठ पर बिठा गए हों। तथापि काव्य में 'औचित्यÓ का सवाल तो उठ ही सकता है। वही उठा है। न्यूनतम बदलाव वाला पाठ- 'शासक की बंदूकÓ की पूंछ (रदीफ) छोड़कर अधिकतम बदलाव वाला ही लगता है। अगले अंक में इस पर विमर्श पढऩा रुचिकर होगा।