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Monday 21 Oct 2019

अक्षर पर्व के अगस्त 2015 अंक में भीष्मजी पर श्याम कश्यप जी का संस्मरण सचमुच प्रगतिशील लेखक संघ के स्वर्णयुग का स्मरण है।

 

अक्षर पर्व के अगस्त 2015 अंक में भीष्मजी पर श्याम कश्यप जी का संस्मरण सचमुच प्रगतिशील लेखक संघ के स्वर्णयुग का स्मरण है। भीष्म जी की सादगी विनम्रता उनकी विचारधारा, प्रतिबद्धता, संघ के लिए समर्पण भाव रोमांचित करते है।
राजकुमार कुम्भज का आलेख पढ़कर लगा ये हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन किस किसका भगवाकरण करेंगे। अंक की दोनों कहानियां - दस रुपये का कज़ऱ् और शहर आते आते सामाजिक सद्भाव एवं मानवीय आदर्श को रेखांकित करती कहानियां हैं।
      शिव कुमार अर्चन, भोपाल