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Thursday 23 Nov 2017

लोग कहते, अकेला हूं मैं,

 

साहिल
'नीसाÓ 3/15, दयानंद नगर (वानिया वाडी),

राजकोट-36002,

मो. 94287-90069
1
लोग कहते, अकेला हूं मैं,
और खुद मानूं कि मेला हूं मैं,

जानते हैं जो खामोशी मेरी
वो ही कहतेे हैं- झमेला हूं मैं

बेचता हूं खुशी छोटी-छोटी
किसी नुक्कड़ लगा ठेला हूं मैं

लौट आना नहीं मुमकिन 'साहिलÓ
कोई बीती हुई बेला हूं मैं।

2
यौवन के जो महके पल हैं
जीवन के वो अमृत-फल हैं,

कल पे भरोसा फरने वाले
सोच जरा तू -कल तो कल है



जग जिसको कहता है बिजली
श्याम बदरिया की पायल है

शब्द-सूरि के मन में झांका
जख्मों का फैला जंगल है