Monthly Magzine
Wednesday 22 Nov 2017

बहुत दिनों के बाद एक पूरा विशेषांक आदि से अंत तक पढ़ा। इसलिए कि \'\'भीष्म विशेषांक बहुत अच्छा निकला है। उसका प्रत्येक लेख सटीक, सार्थक और तथ्यपरक है। भीष्म जी सही मायने में बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे,

डॉ. गंगाप्रसाद बरसैया,

ए-7, फारचून पार्क, जी-3, गुलमोहर भोपाल-39 (म.प्र.)
बहुत दिनों के बाद एक पूरा विशेषांक आदि से अंत तक पढ़ा। इसलिए कि ''भीष्म विशेषांकÓÓ बहुत अच्छा निकला है। उसका प्रत्येक लेख सटीक, सार्थक और तथ्यपरक है। भीष्म जी सही मायने में बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, तभी वे जीवन के कठिन संघर्ष झेलकर भी इतनी सशक्त रचनाएं दे सके। चाहे वे उपन्यास हों या कहानी और नाटक। 'तमसÓ जैसे उपन्यास, 'चीफ की दावतÓ जैसी कहानियां और 'माधवीÓ जैसे नाटकों के प्रसंग, दृश्य और पात्र आंखों के सामने जीवंत हो जाते हैं। उनके लेखन की विशेषता है जीवंत तथ्यों का तटस्थ प्रस्तुतिकरण। वे कहीं भी उपदेशक के रूप में रचनाओं पर सवार नहीं है। तुमने उनके लिए 'अल्पोक्तिÓ शब्द का सही प्रयोग किया है। तुम्हारी प्रस्तावना की यह विशेषता होती है कि संबंधित विषय के मुख्य बिन्दुओं का उद्घाटन। जीवन और समाज की विसंगतियों, अमानवीय आचरणों, साम्प्रदायिकता और नारी अत्याचारों तथा राजनीति के पाखंडों आदि के चित्रण में कहीं भी दुराग्रह नहीं है। सब कुछ की अप्रियता के प्रस्तुतिकरण के बाद भी वे मानवीय आदर्शों के साथ खड़े और जुड़े दिखाई देते हैं। सच्चे साहित्यकार की यह बड़ी खूबी है। सर्वमित्रा ने सही लिखा कि ''उनकी लेखनी की सबसे बड़ी ताकत है जो इंसान और इंसानियत पर भरोसा बनाए रखने का संदेश देती है बिना किसी जोर जबरदस्ती के।ÓÓ दिए गए साक्षात्कारों में ये सब बातें भी देखी जा सकती हैं। संगठन को लेकर उनके प्रयास और चिंता उनके दायित्व पूर्ण स्वभाव के साक्षी हैं। हानूस की घड़ी बनाने वाला, माधवी नाटक में माधवी के साथ ययाति, गालब और विश्वामित्र के अमानवीय निर्लज्ज कृत्य, माधवी की विवशता, 'मय्यादास की माड़ी की रुक्मिणी के साथ किया गया छलÓ पढ़कर अंतरात्मा कांपने लगती है। कल्पना के बाहर है यह सब कृत्य। ऐसे अनेक प्रसंग भीष्मजी की सशक्त लेखनी श्रेष्ठ भाषा शैली और यथार्थ सोच और साहसिक प्रस्तुतिकरण के साक्षी हैं जो उन्हें उसके शताब्दियों तक जिन्दा बनाए रखेंगे। इतने शानदार, सशक्त अंक के लिए बधाई।