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Friday 24 Nov 2017

जीवन के कुछ कड़वे सच


कुलभूषण कालड़ा
27, मजीठिया एन्क्लेव
फे2, पटियाला (पंजाब)147005
मो. 09814245174
1
अपने आसपास
बनती
बिगड़ती
आकृतियों के बीच
जब बिगड़ा
चेहरों का गणित
तो जाना
निभाते ही रहे
मुखौटों से
अब तक।

2
निकट संबंधो ंमें
विलगाव को
सम्पन्नता का स्वभाव कहें
या
सामाजिक व आर्थिक
क्षमताओं की भूमिका
संबंध तो जुड़ते हैं
टूटते भी हैं
मगर टूटने वाले
संबंध
होते तो हैं
घायल व लहूलुहान
विलगाव में मिले
कांच के टुकड़ों से।

3
व्यावहारिकता की
कला
भली प्रकार जानते हैं
वो लोग
जो संबंधों की
परिभाषा
अपने ढंग से
बनाते हैं
कहीं अपने लिए
तो कहीं
दुनियादारी के नाते
संबंध
निभाते हैं।

4
प्रज्ञाशील हो तो
भेड़ों की तरह
लोगों के पीछे चलकर
क्यों बनते हो
केवल
भीड़ का हिस्सा
कुरेदो स्वयं को
और खोजो अपना
आत्मविश्वास
अपना अस्तित्व
जुटा लो
अपनी अर्हता तथा
मेधा से
अपना सामथ्र्य
ताकि बन सको
कुछ 'विशेषÓ
भीड़ से अलग।

5
आजकल
रिश्ते नातों में
अपनेपन के
सुखद भ्रम से
लोग
बचने लगे हैं
अब
औपचारिकता में ही
रिश्ते नाते
निभने लगे हैं।