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Sunday 25 Feb 2018

अक्षरपर्व का रचना वार्षिकी पढ़ कर मन प्रफुल्लित हो उठा।

अक्षरपर्व का रचना वार्षिकी पढ़ कर मन प्रफुल्लित हो उठा। पत्रिका में उत्कृष्टता की परंपरा निभाई गई है। सागर के सदृश सामग्री संयोजन निश्चय ही आपकी संपादन कुशलता का परिचायक है। भीष्म साहनी विशेषांक प्रकाशित कर सच्चे अर्थों में साहनीजी की यादों को जिंदा रखने का पुनीत कार्य किया है। बधाई व शुभकामनाएं।

श्यामसुंदर सुमन, भीलवाड़ा