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Tuesday 15 Oct 2019

अक्षर पर्व लगातार मिल रही है। भीष्म साहनी पर केंद्रित जून अंक संग्रहणीय बन पड़ा है।

अक्षर पर्व लगातार मिल रही है। भीष्म साहनी पर केंद्रित जून अंक संग्रहणीय बन पड़ा है। सचमुच हिंदी समाज किस नींद में सो रहा है, अपने पूर्वजों को याद करने की फुरसत किसी के पास नहीं है।

पत्र-पत्रिकाएँ हों अथवा सोशल मीडिया, हर जगह कुछ न कुछ बहस-विवाद चल ही रहा है, लेकिन भीष्म साहनी उसके केंद्र में कहीं नहीं हैं। क्या भीष्म साहनी ऐसे भुला दिए जाने लायक रचनाकार रहे हैंं?

आपने इस दिशा में पहल कर अच्छा काम किया है। साधुवाद!

अस्मुरारी नंदन मिश्र