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Friday 19 Oct 2018

‘अक्षर पर्व’ का अप्रैल-15 अंक देखने को मिला। प्रस्तावना में ललित सुरजन का लेख पढक़र विषय पर नए तरीके से सोचने की दृष्टि मिली। यह लेख बहुत सामयिक तथा एक स्वस्थ बहस को जन्म देने वाला है।

‘अक्षर पर्व’ का अप्रैल-15 अंक देखने को मिला। प्रस्तावना में ललित सुरजन का लेख पढक़र विषय पर नए तरीके से सोचने की दृष्टि मिली। यह लेख बहुत सामयिक तथा एक स्वस्थ बहस को जन्म देने वाला है। अनुपम मिश्र का लेख इस अंक की विशिष्ट उपलब्धि है। कहानियों में डॉ. सुरेश तिवारी की कहानी ‘पुरखा’ तथा महेश्वर नारायण सिन्हा की कहानी ‘बागी’ अच्छी लगी। कविताओं में अनवर सुहैल, शशिकला त्रिपाठी तथा अशोक शाह पसंद आए और $गकालें परशुराम शुक्ल और कुमार विनोद दोनों की अच्छी हैं। हां एक जो रचना बेहद पठनीय और रोचक है वह है डॉ. शोभा निगम का शोध आलेख। पत्रिका का सादगी भरा प्रस्तुतिकरण तो सराहनीय है ही। कुल मिलाकर ‘अक्षर पर्व’ का यह अंक बहुत पसंद आया। ऐसी उपयोगी, पारिवारिक पत्रिका के लिए आपको साधुवाद।

अखिलेश श्रीवास्तव

सी-2, एच-पार्क, महानगर लखनऊ-226006

मो.- 9415215139