Monthly Magzine
Saturday 18 Nov 2017

अक्षर पर्व मई-15 अंक मिला। हर अंक में कुछ न कुछ विशेष, रोचक, पठनीय मिलता है। इसलिए अक्षर पर्व मेरी प्रिय पत्रिका है। इस बार के सम्पादकीय में आपने साहित्यिक यात्रा का रोचक विवरण दिया है।

अक्षर पर्व मई-15 अंक मिला। हर अंक में कुछ न कुछ विशेष, रोचक, पठनीय मिलता है। इसलिए अक्षर पर्व मेरी प्रिय पत्रिका है। इस बार के सम्पादकीय में आपने साहित्यिक यात्रा का रोचक विवरण दिया है। चन्द्रकांत देवताले पर जो लिखा वह अच्छा लगा। शायद इसलिए कि वे मेरे भी मित्र हैं, चाहे उम्र में मुझसे छोटे हों। रामकिशोर मेहता का लेख ‘अंधविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ इस अंक की उपलब्धि है। नंदकिशोर आचार्य की कविताओं, राकेश अचल की गकाल ने मन मोह लिया। अन्य कई रचनाएं पसंद आई पर वैद्यनाथ झा ने कुंअर बेचैन का जो साक्षात्कार लिया है, वह बेहद पसंद आया। कवि सम्मेलन से जुड़े अनेक कवियों की रचनाओं में वह साहित्यिकता और कला नहीं मिलती जो कुंअर बेचैन के गीतों, उनकी $गकालों में है।

डॉ. सुधेश

314, सरल अपार्टमेंट्स, द्वारिका सेक्टर-10

दिल्ली-110075, मो.- 09350974120