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Saturday 17 Feb 2018

भीष्म साहनी विशेषांक के लिए बधाई स्वीकार करें। बहुत दिनों बाद किसी पत्रिका का इतना अच्छा अंक मिला।

 भीष्म साहनी विशेषांक के लिए बधाई स्वीकार करें। बहुत दिनों बाद किसी पत्रिका का इतना अच्छा अंक मिला। वास्तव में आपने इसमें बहुत मेहनत की है। यूं तो सभी लेख अच्छे हैं, विशेषकर प्रस्तावना, तमस और वे दिन, भीष्मजी कुछ यादें, क्या यहां से चला गया कोई, तमस की कहानी भीष्मजी की जुबानी, ने बहुत प्रभावित किया। भीष्मजी की कहानी मैं भी दिया जलाऊंगा मां बहुत अच्छी लगी। एक बार फिर बधाई देेते हुए अनुरोध करूंगा कि ऐसा ही अंक निर्मल वर्मा पर भी निकालना चाहिए। इस काम को आप ही कर सकते हैं। जो काम होना चाहिए था, अभी तक नहींहो सका है। अक्षरपर्व परिवार को मेरी शुभकामनाएं।

रजा़ ज़ाफरी