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Saturday 18 Aug 2018

अक्षर पर्व अप्रैल अंक पढक़र खुशी हुई। ग्रिगोरी खोजर की कहानी का अनुवाद बहुत सुन्दर है। कहानी बड़ी जीवंत है। ऐसा खाका खींचा मानो सब सामने घटित हो रहा है।

अक्षर पर्व अप्रैल अंक पढक़र खुशी हुई। ग्रिगोरी खोजर की कहानी का अनुवाद बहुत सुन्दर है। कहानी बड़ी जीवंत है। ऐसा खाका खींचा मानो सब सामने घटित हो रहा है। मिशन भी पूरा है। बैठे ठाले खाना अच्छा नहीं। आधुनिकता से दूर बाबा एक आदर्श चरित्र चित्रित हंै। बुजुर्ग लोगों को सीख लेने चाहिए।

-गिरीशचंद्र चौधरी,

भारतेन्दु भवन, चौखंभा, वाराणसी-221001

फोन- 0542-2420257