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Saturday 18 Nov 2017

सेल्फी वाला समाज


तीन अलग-अलग खबरें हैं, जिनकी व्याख्या एक संदर्भ में की जा सकती है। बेटी के साथ सेल्फी खींचने वाले अभियान पर विरोध का ट्विट करने और प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाली श्रुति सेठ को आलोचनाओं का पात्र बनना पड़ा। भारत ने महिला हॉकी वल्र्ड लीग सेमीफ़ाइनल में जापान को 1-0 हराकर पाँचवां स्थान हासिल किया और रियो ओलंपिक में खेलने की उम्मीदों को जिंदा रखा है। संघ लोकसेवा आयोग के नतीजे इस बार साक्षात्कार समाप्त होने के चार दिनों बाद ही जारी कर दिए गए और इसमें लड़कियों ने अपना दबदबा बनाया। प्रथम चार स्थानों पर लड़कियां आई हैं, उसके बाद लडक़ों की बारी शुरु हुई। इन तमाम खबरों को भारत में महिलाओं की स्थिति, बालिका शिक्षा, स्त्री विमर्श या बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ जैसे जुमलों के अंतर्गत रखकर विश्लेषित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार मन की जो बात की, उसमें महिला सुरक्षा पर चर्चा की, उसे रक्षाबंधन से जोड़ा, क्योंकि अगस्त में ही यह त्योहार आएगा। हरियाणा के जींद जिले के बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जगलान ने सेल्फी विद डाटर अभियान प्रारंभ किया था, ताकि गिरते लिंगानुपात को संभाला जा सके। प्रधानमंत्री ने इस अभियान का जिक्र मन की बात में किया और लोगों से अपील की कि वे अपनी बेटी के साथ सेल्फी भेजें। बस किसी नए शगल में व्यस्त होने की प्रतीक्षा में लगे लोगों ने इस अभियान को हाथों-हाथ उठाया और अपनी-अपनी बेटियों के साथ सेल्फी की सोशल मीडिया में बाढ़ सी आ गई। बेटी के साथ सेल्फी किसी सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक, शैक्षणिक दायित्व का बोझ उठाने को बाध्य नहींकरती। आप अपनी बेटी को उसकी जिंदगी जीने की आजादी दें, दूसरी महिलाओं की इज्जत करें, बहुत सी सामाजिक मान्यताएं जिनके कारण महिलाओं को पुरुषों से एक पायदान नीचे रखा गया है, उन्हें खत्म करने की हिम्मत दिखाएं, घर-बाहर हर जगह महिला सुरक्षा पूर्णरूपेण कायम हो, महिला उत्पीडऩ पर हर तरह से रोक लगे, लैंगिक समानता की ऐसी बहुत सी जरूरी बातें सेल्फी के फ्रेम से बाहर हैं। बेटी को पास बिठाकर सेल्फी लेना आसान है, इसलिए बहुत लोगों ने सेल्फी ली। लेकिन कुछ लोग हैं जिन्होंने ऐसे सांकेतिक अभियान पर सवाल उठाए। सामाजिक कार्यकर्ता कविता कृष्णन और कलाकार श्रुति सेठ ने ट्विटर पर इसका विरोध किया और उसकी जगह महिलाओं के प्रति मानसिकता बदलने की बात कही तो उन्हें तरह-तरह के अपशब्द जवाब में मिले। श्रुति सेठ के पति मुस्लिम हैं, इस पर भी उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। प्रधानमंत्री के एक कदम की आलोचना करने पर उनके समर्थकों ने जिस तरह का व्यवहार सुश्री कृष्णन और सुश्री सेठ के साथ किया, उससे बेटी के साथ सेल्फी लेने की मानसिकता का सच अपने आप सामने आ गया। अगर हम केवल सांकेतिक प्रयासों में ही उलझे रहेंगे तो महिलाओं की स्थिति सुधरने की जगह और खराब होगी, यह संकेत इस प्रकरण से स्पष्ट निकल कर आया है। दूसरी खबर हाकी की भारतीय महिला टीम 1980 के बाद से ओलंपिक में शामिल नहींहो पाई है, लेकिन इस बार वह हाकी वल्र्ड लीग में पांचवे स्थान पर है और बहुत उम्मीद है कि वह ओलंपिक का टिकट प्राप्त कर लेगी। राष्ट्रीय खेल की महिला टीम का यूं पांचवे स्थान पर आना कोई उपलब्धि नहींकही जा सकती, लेकिन भारतीय महिला हाकी टीम के लिए यह बहुत बड़ी बात है। इस टीम में कई खिलाड़ी ऐसी हैं जो भारत के छोटे-छोटे शहरों से बहुत कम साधनों, सुविधाओं और प्रशिक्षण के बूते यहां तक पहुंची हैं। देश में खेल के नाम पर क्रिकेट की बात होती है और हाल के वर्षों में मुक्केबाजी, तीरंदाजी, बैडमिंटन, टेनिस भी इसमें शामिल हो गए हैं। विश्व स्तर की महिला खिलाड़ी उंगलियों पर गिनने लायक हैं, इसकी वजह प्रतिभा की कमी नहींहै, बल्कि प्रतिभा का दमन है। अगर महिला हाकी टीम ओलंपिक में शामिल होती है, तो देश की खिलाड़ी बच्चियों का हौसला इससे मजबूत होगा। तीसरी खबर संघ लोकसेवा आयोग के नतीजों ने इस बार महिला प्रतिभा का लोहा मनवाया। प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ सभी लड़कियां हैं। इनमें भी प्रथम स्थान पर रही इरा सिंघल 60 प्रतिशत तक शारीरिक रूप से विकलांग हैं। इस शारीरिक कमी के कारण उन्हें कठिन संघर्षों से गुजरना पड़ा। 2010 में वे भारतीय राजस्व सेवा में चयनित हुई थीं, तब उन्हें विकलांगता का हवाला देकर नियुक्ति नहींदी गई। फिर उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी और नियुक्ति हासिल की। बार-बार अपनी प्रतिभा साबित कर इरा ने दिखला दिया कि शारीरिक विकलांगता उनके हौसलों के आड़े नहींआती, लेकिन समाज और प्रशासन की संवेदनहीनता उन्हें और उनके जैसे बहुत से लोगों को याद दिलाती है कि आप अपनी विकलांगता से परेशान नहींहो, तो हम आपको परेशान करेंगे। क्या इस संवेदनहीनता को दूर करने के लिए अगला सेल्फी अभियान किसी विकलांग के साथ चलाया जाएगा।