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Friday 24 Nov 2017

इंसान की तरक्की


ज्ञानदेव मुकेश
कुछ अपराधी एक साथ बैठे हुए थे। वे अपने पुराने हथियार को लेकर बड़े दुखी हो रहे थे। एक ने कहा- ''यारो, दुनिया कहां से कहां आगे निकल गई। मगर इन विज्ञानवालों ने हथियारों में कोई बदलाव नहीं लाया। आज भी वही पिस्तौल, वही रिवाल्वर, वही एके-47। अब इनसे ज्यादा खूंखार हथियार बने नहीं।ÓÓ
इस पर एक दूसरे अपराधी ने कहा- ''मार गोली विज्ञानवालों को। जो काम उन्होंने नहीं किया, वो हमने कर दिखाया।ÓÓ
पहले ने पूछा- ''वह कैसे?ÓÓ
दूसरे ने कहा- ''हमारे कुछ साथियों ने हथियारों को और खूंखार बनाकर तरक्की दी। जो आज तक नहीं हुआ, वो अब हुआ। हमने इन हथियारों से बच्चों तक की लाशें बिछा दीं। अब क्या चाहिए?ÓÓ
द्वारा- श्री पी.एन. शाही, जैतपुर कॉलोनी, माड़ीपुर, मुजफ्फरपुर-842001 (बिहार)