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Tuesday 21 Nov 2017

एक दरिया में बहता पानी है, जि़ंदगी की यही कहानी है

 

ब्रह्मजीत गौतम
युक्का, 206, पैरामाउण्ट सिम्फनी  
क्रॉसिंग रिपब्लिक, ग़ाजिय़ाबाद  201016   
मो. 976007838
गज़़ल
1

एक दरिया में बहता पानी है
जि़ंदगी की यही कहानी है

चंद साँसें हैं, दु:ख हैं, सुख हैं
कैसी उम्दा ये बाग़बानी है

आ के जाये न, है बुढ़ापा वह
जा के आये न, वह जवानी है

झूठ के साथ है खड़ी दुनिया
कितनी मुश्कि़ल में हक़बयानी है

उम्र भर का विलाप और तड़पन
प्यार की बस यही निशानी है

कर लिया है प्रबंध जन्मों का
यह सियासत की मेहरबानी है

भीड़ में जीत खो नहीं जाना
यह नहीं गाँव, राजधानी है

2
वक्त ने मंजऱ दिखाये जो हमें
याद जीवन भर रहेंगे वो हमें

जो बुलन्दी दूर अपनों से करें
रब, न देना उस बुलन्दी को हमें

सारे बादल पानी-पानी हो गये
गर्जना से थे डराते जो हमें

धर्म के सांचे ढले बुत हैं सभी
एक तो इंसान दिखला दो हमें

हादसे ही हादसे हैं हर तरफ़
अम्न का दे दो पता कुछ तो हमें

उम्र भर हम धूप में चलते रहे
छाँव में अपनी जऱा ले लो हमें

जोड़ दे इंसान को इंसान से
जीत वो तजवीज़ बतला दो हमें