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Sunday 19 Nov 2017

आवश्यकता

आवश्यकता

-प्रहलाद श्रीमाली
नं. 42/31, रघुनाय कुलू, स्ट्रीट
पार्क टाउन, चेन्नई-600003

खिलौने वाला कंपार्टमेंट में बच्चों को देखकर देर तक खड़ा रहा। अपने खिलौनों से खेलता हुआ और बच्चे उसे ललचायी नजर से देखते हुए लेने की जिद करते रहे। उसके सात्विक आग्रह के  बावजूद उनके अभिभावकों ने खिलौने नहीं लिए तो वह अगले कंपार्टमेंट की तरफ बढ़ गया। यहां एक भी बच्चा नहीं था इसलिए उसने रुकना फिजूल समझा। आजकल मां-बाप अपने बच्चों को प्यार क्यों नहीं करते! इस बिन्दु पर चिंतित होते हुए वह आगे बढ़ ही रहा था कि एक युवक ने उसे रोककर ढेर सारे खिलौने खरीद लिए। उसे अचरज तो हुआ, पर तुरंत यह बात उसके ध्यान में आई कि युवक ने खिलौने अपने घर के बच्चों के लिए खरीदे होंगे। थोड़ी देर बाद पुन: उसी कंपार्टमेंट से गुजरते हुए खिलौने वाले ने देखा वे बच्चे उस युवक के पास बैठकर खिलौनों से खेल रहे थे। और उन्हें खेलते हुए उसकी आंखों में ठीक वैसी ही चमक थी जैसी मनचाहे खिलौनों से खेलते हुए बच्चों की आंखों में होती है। खिलौने वाला समझ गया, युवक इस वक्त अपने बचपन में पहुंचकर तब नहीं खेल पाने की कसर अब निकाल रहा है। क्योंकि वह खुद भी तो कभी कभार गुंजाइश निकालकर ऐसा कर लिया करता है।

बारी से पहले
‘बारी से पहले जिन लोगों ने सरकारी आवास रिश्वत देकर आबंटित करा लिए थे उन्हें रियायत देकर सरकार खुलेआम दुव्र्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।’’ एक ने आक्रोश से कहा। ‘‘अरे यार सरकार की बात छोड़ो। मैं तो कहता हूं हर आदमी को अपनी आत्मा की आवाज के आधार पर सोचना चाहिए कि किसी और की बारी में वह सुविधा खुद हड़प लेना कितना अमानवीय कर्म है। अरे पंक्तिबद्धता के नियम तो जीवजंतु तक मानते हैं। पर अपने देश का आदमी तो उनसे भी गया गुजरा निकला।’’ दूसरा और ज्यादा उत्तेजित था। वे दोनों रेल के रुकते ही प्लेटफार्म पर उतरे और अपने-अपने बादले (वाटर बेग) थामे जल्दी-जल्दी पीने के पानी के नल की ओर बढ़े। जहां पहले यात्रियों की अच्छी खासी भीड़ लगी थी जो इसी रेल से उतरे थे। अतिरिक्त सक्रियता बरतते हुए एक ने भीड़ में घुसकर नल पर कब्जा किया और पीछे-पीछे दूसरे ने भी अपना बादला भर लिया। भीड़ अब भी पानी भर रही थी।  ‘‘जल्दी चलो गाड़ी यहां ज्यादा देर नहीं रुकती’’ पहले ने सलाह सी दी।  ‘‘सो तो है। मगर सरकार को इतना बंदोबस्त तो करना चाहिए कि यात्री आराम से अपनी जरूरत जितना पानी भर सकें।’’ दूसरे ने डिब्बे में चढ़ते हुए कहा।  अपनी-अपनी सीट पर बैटकर फिर से सरकार को कोसने में लग गए। बीच-बीच में खिडक़ी से प्लेटफार्म पर नजर भी डालते जा रहे थे। सामने नल खाली पड़ा था और गाड़ी अब भी खड़ी थी।