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Monday 22 Oct 2018

भूकम्प

अशोक कुमार प्रजापति
‘पारिजात भवन’
1112/बी-6, मौर्य विहार ;कुम्हरार, पोस्ट-बहादुरपुर हाउसिंग कॉलोनी,पटना-800026,
मो. 9771425157
पवित्रा नदी के किनारे एक घनी आबादी वाला शहर बसा था।  शहर के मुहल्लों में पांच-पांच फीट की गलियों में बनी सात-सात मंजिली इमारतों में कई धर्मों के लोग निवास करते थे। लेकिन ऊँची इमारतों में रहने भर से इंसान के विचार भी ऊँचे नहीं हो जाते। धार्मिक कट्टरता और श्रेष्ठता की वजह से वे आपस में झगड़ते रहते और जब-तब दंगा भडक़ उठता। उनके बीच नफरत का ये आलम था कि वे एक दूसरे की पूजा स्थलों में प्रवेश करना तो दूर, झाँकना भी पाप समझते थे। उन पूजा स्थलों में विराजमान प्रभुओं को एक दूसरे की प्रार्थनाओं से भले कोई शिकायत न हो, पर उनके भक्तों को जबर्दस्त ऐतराज होता था। वक्त यों ही गुजर रहा था। एक दिन अचानक आठ रिक्टर स्केल की तीव्रता वाला भूकम्प उस महादेश खंड को हिला गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए चीखते-पुकारते खुले स्थान की तलाश में इधर-उधर पागलों की तरह दौड़े लेकिन खुली जगह रहे तब न? ले-देकर पूजा स्थलों में ही कुछ जगह बची थी। मरता क्या न करता, जिसे जिसमें मौका मिला शरण ली और अपने-अपने ईश्वर से सलामती की दुआ मांगी। दहशत के बीच जैसे-तैसे रात गुजरी। सैकड़ों लोग अपने ही जमींदोज हुए आशियाने में दफन हो गये। प्रकृति का कहर बिना किसी भेद-भाव के सब पर बरपा। पूजा स्थलों को भी कुछ नुकसान पहुँचा। सुबह शरण लिये लोग बिना किसी बैर-भाव के उन क्षतिग्रस्त पूजास्थलों की मरम्मती में लगे थे।  उस भूकम्प के बाद शहर में न तो कभी दंगे-फसाद हुए और न उन धार्मिक स्थलों से उठने वाली प्रार्थनाओं से किसी को कोई एतराज हुआ।