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Friday 24 Nov 2017

\'अक्षर पर्व\' के फरवरी 2015 से मुखातिब हूं। पत्रिका का कायिक कलेवर दिन-ब-दिन निखरता ही जा रहा है।

 

डॉ. मधुर नज़्मी
'काव्यमुखी साहित्य अकादमी'
गोहना मुहम्मदाबाद, जिला- मऊ
मो. 09369973494

'अक्षर पर्व' के फरवरी 2015 से मुखातिब हूं। पत्रिका  का कायिक कलेवर दिन-ब-दिन निखरता ही जा रहा है। 'अक्षर पर्वÓ में यह 'निखारÓ 'कायिक कलेवरÓ के साथ-साथ अन्त: सामग्री के चुनाव संचयन और संयोजन के नरिए से भी, पत्र लिखने और लिखते रहने के लिये प्रेरित-उत्कंठित करता रहता है। अपनी प्रकृति में, व्यावहारिक जीवन में 'श्रेष्ठÓ लेखन की ताईद और घटिया लेखन की मरम्मत करना अपने स्वभाव में शामिल है। 'प्रस्तावनाÓ के अंतर्गत पहले मलय की रचनाशीलता पर आपके कलम की वैचारिक गुलकारियां फिर डॉ. सुरेन्द्र तिवारी की सद्य: प्रकाशित कृति को 'मीटरÓ मानकर लिखना, यह आपकी विचार-दृष्टि की सम्पन्नता का संकेतक है। आपने डॉ. सुरेन्द्र तिवारी द्वारा जिन-जिन प्राकृतिक दृश्यों को अपने कलम का ईमान बनाया है, सबके सब प्राकृतिक सूत्र अपनी अन्त: सूत्रात्मक से संवेदनशील मनों को कसकर और जमकर बांधने वाले हैं। किसी को भी ऐसी अनुभूति नहीं होगी कि कृतिकार को 'प्रोजेक्टÓ करने का संपादक का नजरिया है। 'कुछ ऐसे हुआ हक अदा दोस्ती काÓ का आरोप भी कोई नहीं लगा सकता। डॉ. सुरेन्द्र तिवारी की अदबी खूबियों पर आपकी यह टिप्पणी काफी असरकारी है। ''यहां से सुरेन्द्र जी! हमारे सामने एक पूरा 'अलबमÓ खोलकर रख देते हैं। उसमें कहीं समुद्र तल पर कछुओं के नष्ट हुए असंख्य अंडों का चित्रण है तो कहीं लम्बी पूंछ वाली गिलहरी शेकरू, कही छलांग भरती कोयटी लोमड़ी है तो कहीं पेड़ पर चढ़ी चींटी खोर पैंगोलिन...ÓÓ प्रकृति से राग-सरोकार रखने वाला संवेदनशील मन इस मेजर निगारी का ख्य़ाल करके मुग्ध और तिलमिला जाएगा- भाई ललित जी। यह खाकसार बगैर आहत, आंदोलित हुए नहीं लिखता। लेखकीय घराने की यह प्रक्रिया जहां भी है स्वागतेय है। ईश्वर आपका यह लेखकीय ईमान सलामत रखे। 'स्व. महेश भारती की कविताओं पर आदरणीय धनंजय वर्मा की टिप्पणी काफी असरकारी है। ज़हीर कुरैशी की चारों गजलें सादगी और पुटकारी का नमूना है। हितेश व्यास की पहली, दूसरी और तीसरी गजल व्याकरण में टूटी हुई है। तीनों ही गजलों  के प्रत्येक शेर में अदबी $खामियां हैं, 'एक लेखक की मौत'के हवाले से सर्वमित्रा जी ने 'उपसंहारÓ के माध्यम से 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' पर 'एक संजीदा सवालÓ किया है।