Monthly Magzine
Saturday 18 Aug 2018

अप्रैल अंक में अनुपम मिश्र का लेख, प्रस्तावना और उपसंहार तो सामयिक हैं ही, साथ ही स्व.कृष्णदत्त पालीवाल पर रेशमी पांडा मुखर्जी का आलेख भी जरूरी लगा।

रामनिहाल गुंजन,

नया शीतला टोला, आरा, बिहार

अप्रैल अंक में अनुपम मिश्र का लेख, प्रस्तावना और उपसंहार तो सामयिक हैं  ही, साथ ही स्व.कृष्णदत्त पालीवाल पर रेशमी पांडा मुखर्जी का आलेख भी जरूरी लगा। कहानियां ठीक हैं। जीवन सिंह ठाकुर का व्यंग्य, अशोक शाह, अनवर सुहैल तथा शशिकला त्रिपाठी की कविताएं तथा समीक्षा भी पठनीय लगे। अमरीकी ब्लागर अविजित राय की हत्या सचमुच स्तब्धकारी है।
मई अंक यथासमय प्राप्त हो गया। इस अंक की प्रस्तावना और उपसंहार के साथ ही प्रकाशित लेख, कहानियां और कविताएं भी सामान्यत: ठीक लगे। वैसे जयनाथ मणि त्रिपाठी का लेख पूर्वी लोकगीतों में रामचरित और डा.कृष्ण  भावुक का नजरूल इस्लाम पर लिखा लेख खासतौर पर पसंद आए। आगामी अंक बेहतर होंगे, इसी उम्मीद के साथ।