Monthly Magzine
Tuesday 15 Oct 2019

इतनी प्रचण्ड गर्मी मन और तन दोनों व्याकुल और इसी व्याकुलता के कारण जब मौसम का मिजाज कुछ नरम पड़ गया है


नवनीत कुमार झा
हरिहरपुर, दरभंगा
इतनी प्रचण्ड गर्मी मन और तन दोनों व्याकुल और इसी व्याकुलता के कारण जब मौसम का मिजाज कुछ नरम पड़ गया है तब मैंने मई अंक को जरा विलम्ब से पढऩा शुरू किया, पर प्रस्तावना को पढऩा शुरू किया, तो मैंने ये महसूस किया कि मेरे मन में भारत के प्राचीनतम नगर उज्जैन के दर्शन की अभिलाषा जाग उठी है ! ललित जी के शब्दों में एक प्रलोभन सा था, या कहिए कि एक अद्भुत आमन्त्रण ! यात्रा करने में भला कौन होगा जिसे मजा न आए ! प्रस्तावना को पढऩा एक सुखद अनुभव रहा !! कल मुझे भी अचानक जयपुर यात्रा पर निकलना है मजे में यात्रा करते हुए अक्षर पर्व के मई अंक के पाठ का आनन्द उठाउँगा !!