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Saturday 18 Nov 2017

भीष्म साहनी स्मृति कहानी कार्यशाला


मप्र प्रगतिशील लेखक संघ की कार्यशाला आयोजन की श्रृंखला में इकाई-छिंदवाड़ा ने भीष्म साहनी की स्मृति को समर्पित राज्य स्तरीय कहानी कार्यशाला 9-10 मई को आयोजित की। म प्र प्रलेसं महासचिव विनीत तिवारी (इंदौर) ने कहानी शिविर की भूमिका पर वक्तव्य देते हुए कहा कि प्रलेस में इस तरह की कार्यशालाओं की परंपरा रही है जिनमें नए लेखकों को लेखन, विचारधारा और तकनीक के स्तर पर मजबूती और दिशा दी जाती है। उन्होंने वर्तमान में उपज रहे लेखन के संकट, विचारधारा के संकट और लेखकों पर हो रहे प्रहारों का जिक्र करते हुए समकालीन कहानी के सामाजिक सरोकारों से अवगत कराया। कवि-आलोचक हनुमंत वर्मा ( जबलपुर ) ने भीष्म साहनी पर केन्द्रित वक्तव्य देते हुए कहा कि भीष्म साहनी की कहानियों में चमत्कृत भाषा या बड़े मुहावरे न होकर सहजता और तार्किकता होती है। ये मात्र व्यक्ति की स्थितियों का अंतर्विरोध न होकर, उसके आसपास के सामाजिक जीवन का अंतर्विरोध होती हैं। आकाशवाणी केन्द्र छिंदवाड़ा के उद्घोषक अवधेश तिवारी ने भीष्म साहनी की कहानी  साये  का पाठ किया। इस सत्र के मुख्य अतिथि हरमिन्दर सिंह लूथरा थे। प्रथम-सत्र रमाकांत श्रीवास्तव वरिष्ठ कहानीकार ( भोपाल ) के वक्तव्य  समकालीन कहानी का सफर से प्रारंभ हुआ। उन्होंने समकालीन कहानी को रचना की प्रवृत्ति और उसका इतिहास से संबंध से जोड़़ते हुए व्याख्यायित किया। नवोदित कहानीकार अनुपम दाहिया( सतना) ने  मनोहरा तथा शेखर मल्लिक ( जमशेदपुर ) ने  वी आर एस कहानी का पाठ किया। इन कहानियों पर टिप्पणी सुबोध कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ कहानीकार (भोपाल), हनुमंत मनगटे , वरिष्ठ कहानीकार (छिंदवाड़ा ), अनिल करमेले, कवि (भोपाल), बंशीलाल परमार, वरिष्ठ चित्रकार-कहानीकार (मंदसौर ) ने दी।
 द्वितीय सत्र का प्रारंभ दिनेश भट्ट के वक्तव्य   कहानी के कथ्य के स्रोत , भाषा , शिल्प और सौंदर्य  से हुआ। प्रतिभागियों में पंकज सोनी (छिंदवाड़ा) ने अच्छे दिनों का मेला और खेमराज श्रीबंधु (छिंदवाड़ा ) ने  गुरु दक्षिणा कहानी का पाठ किया। टिप्पणी रमाकांत श्रीवास्तव , रजनीश श्रीवास्तव , लेखक-पत्रकार (दिल्ली) तथा विनीत तिवारी, राजेश झरपुरे कहानीकार (छिंदवाड़ा) ने दी। मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार गुणेन्द्र दुबे थे। विजय आनंद दुबे ने जनगीत गाया। सायं सत्र में वरिष्ठ कथाकारों के कहानी पाठ हुए।