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Tuesday 26 Mar 2019

गज़़ल

 


धर्मेन्द्र निर्मल
कुरूद भिलाई नगर
दुर्ग 490024
मो. 9406096346
चलती फिरती लाश हूँ मैं।
दहकता हुआ पलाश हूँ मैं।।
कितना ही घुप्प अंधेरा हो।
चमकता हुआ उजास हूँ मैं।।
मौसम के खिलवाड़ों से।
सुलझता हुआ उल्लास हूँ मैं।।
लक्ष्य दूर है क्या हुआ।
चहकता हुआ प्रयास हूँ मैं।।
समय साथ दे न दे मेरा।
महकता हुआ कयास हूँ मैं।।