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Thursday 23 Nov 2017

गांधी की लाठी


डॉ.राधामणि
हिंदी विभाग , महाराजास कॉलेज    

एरनाकुलम , केरल. 682 011
मो. 9497023052
गांधी की लाठी को देखकर
बहुत उदास हूं मैं अब।
गांधी के हाथ में लाठी
लाठी के बल चलते गांधी बाबा !
पुलिस के हाथों में है लाठी
जिसे देख बहुत डरती हूँ मैं
लाठी के बल पर वह पीटती है
निर्मम बेकसूरों-मासूमों को !
           
गांधी अब आते तो
रो जाते समाज की हालत से
गिरा देते संसद को
जहां चर्चा का व्यापार ज़ोरों से चलता है !
राजनीतिकों के हाथों में ही नहीं
बातों में भी लाठी है
जादूगर सा वे रचते हैं इंद्रजाल
बातों की लाठियों से !
पीटते हैं लाठियों से आपस में
घोर घोर वैर सा
बेचारा है गधा जो
गिद्ध को न समझ पाता !
गांधी अब जि़ंदा रहते
मार डालते इन गिद्धों को
जरूर अपनी लाठी से !
भूलकर अपना उसूल
यह हिंसा पाप है
राजभवन के नजदीक
रो रहे हैं गांधी बाबा
अपने ही देश के नेताओं की
करतूत काली देखकर !
कर्मवीर धर्मवीर सत्यवीर गांधी
राजभवन के सामने
खड़े हैं उदास होकर
लाठी के बल पर !
एक मात्र सहारा है यह लाठी
लाठी टूटी तो क्या होगा गांधी का !
टूटी लाठी लेकर भागेंगे नेता
अपनी स्वार्थ पूर्ति खातिर !
लाठी तो गांधी की है न !
मिलेगा ज्यादा रुपया पैसा
बेचने के लिए रखेंगे बाज़ार में
ग्लोबलाइजेशन का है जमाना !
विलायत में बेचेंगे तो  
मिलेगा डॉलर सारा
डालने की सुविधा है
स्विस बैंक में गुप्त रूप से  !
सोचना है हमें अब
गांधी की लाठी है
टूटी या फूटी हो
मोल भाव के परे है !