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Sunday 19 Nov 2017

अक्षर पर्व का फरवरी अंक अच्छा लगा। इसमें प्रकाशित जाफर मेहदी, राकेश भारतीय और इंद्रप्रकाश कानूनगो की कहानियां,

रामनिहाल गुंजन, नया शीतल टोला, आरा-802301

 अक्षर पर्व का फरवरी अंक अच्छा लगा। इसमें प्रकाशित जाफर मेहदी, राकेश भारतीय और इंद्रप्रकाश कानूनगो की कहानियां, ओम भारती द्वारा प्रस्तुत स्व.महेश प्रसाद भारती की कविताएं, सच्चिदानंद जोशी की कविता पेशावर, अशोक सिंह की दुख में तुम्हारी हंसी तथा अनूप अशेष का नवगीत और जहीर कुरैशी की गज़़लें सभी अच्छे हैं। यों इस अंक की प्रस्तावना और उपसंहार के साथ-साथ सुमीत कुमार मीणा के शोध आलेख, अरूण अभिषेक की कथाकार चंद्रकिशोर जायसवाल से बातचीत और मंटो के खत की समीक्षा भी ठीक लगी। सर्वमित्रा जी का फ्रांसीसी पत्रिका शार्ली एब्दो और तमिल लेखक मुरुगन के पक्ष में लिखा लेख जरूरी है।

मार्च अंक में ललित सुरजन की प्रस्तावना के साथ-साथ अजित कुमार का लेख नागार्जुन का कविकर्म तथा राहुल देव का लेख कविता का लोकतंत्र दोनों पठनीय हैं कहानियां भी पठनीय हैं। वैसे सुषमा मुनींद्र और कुंवर किशोर टंडन की कहानियां ज्यादा ठीक लगीं। तरसेम गुजराल की अनूदित जर्मन कहानी भी अच्छी लगी। शेख मोहम्मद कल्याण का संस्मरणात्मक लेख, बशीर बद्र से की गई बातचीत, कविताएं तथा गजलें भी पसंद आईं। विजेंद्र की कविताओं पर अमीरचंद वैश्य का लेख और प्रधानमंत्री के तोहफों पर उपसंहार भी ठीक लगा।