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Wednesday 17 Jan 2018

अक्षरपर्व अप्रैल अंक अपनी अभिनव सामग्री से सुसज्ज व सुसमृद्ध है।

प्रो.भगवानदास जैन,

अहमदाबाद-382445

अक्षरपर्व अप्रैल अंक अपनी अभिनव सामग्री से सुसज्ज व सुसमृद्ध है। सर्वमित्रा जी का उपसंहार अपनी स्पष्टवादिता एवं दो टूक चिंतन के कारण सर्वथा चिंतनीय बन पड़ा है। अमरीका निवासी अविजित राय जैसे निर्भीक एवं साफगो ब्लागर की निर्मम हत्या से न केवल प्रबुद्धजन अपितु सर्वसाधारण भी क्षुब्ध व चिंतित हैं। निश्चय ही प्रत्येक राष्ट्र्र की सरकार को ऐसे कट्टरवादियों के प्रति कठोर कदम उठाने चाहिए। अन्यथा दुनिया से सत्य की आवाज ही सदा के लिए तिरोहित हो जाएगी। हालांकि बकौल आपके व्यक्ति मरते हैं, विचार नहीं, हमें आशा की किरण दिखाकर आश्वस्त अवश्य करते हैं। ललित सुरजन की प्रस्तावना भी कुछ ऐसे ही स्वर को बुलंद करती है। सेंसरशिप, प्रतिबंध, सामूहिक विरोध आदि से रचनात्मक अभिव्यक्ति और उसके स्वातंत्र्य का गला नहींघोंटा जा सकता। ललितजी ने बड़े सलीके और तरीके से सोदाहरण स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में विरोध भी जायज है किंतु अनुशासन व संयम के दायरे में रहकर। ध्वंसात्मक तरीके से तो समाज में अराजकता व्याप्त हो जाएगी जो अंतत: आत्मघाती सिद्ध होगी।