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Thursday 23 Nov 2017

फरवरी 2015 की प्रस्तावना में सुरेन्द्र तिवारी की अद्भुत पुस्तक ‘विश्व के बीहड़ वन प्रान्तरों के लोमहर्षक प्रसंग’ की आपने तलस्पर्शी समीक्षा लिखी है।

फरवरी 2015 की प्रस्तावना में सुरेन्द्र तिवारी की अद्भुत पुस्तक ‘विश्व के बीहड़ वन प्रान्तरों के लोमहर्षक प्रसंग’ की आपने तलस्पर्शी समीक्षा लिखी है। प्रकृति के विविध रूपों की झलक के साथ उसे बचाने का लेखक का आग्रह स्पष्ट है। चंदकिशोर जायसवाल पर अरुण अभिषेक का साक्षात्कार चन्द्रकिशोर के लेखन की गहरी पर्ते खोलता है, साथ ही उनका व्यक्तित्व भी उभरकर आया है। अनेक पठनीय कहानियों के साथ अनेक मार्मिक कविताएं भी पढ़ीं। जैसे महेश प्रसाद भारती की कविताएं, जिनमें लय की रक्षा की गई है। सच्चिदानंद जोशी, सुरेन्द्र प्रबुद्ध, अंकुश्री की कविताएं, अनूप अशेष के गीत, जहीर कुरैशी, हितेश व्यास की $गकालें पसंद आईं। चैपलिन पर तरुशिखा ने अच्छा प्रकाश डाला है। मण्टो के खत भी रोचक हैं।

-डॉ. सुधेश

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