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Friday 19 Oct 2018

फरवरी अंक में चंद्रकिशोर जायसवाल का साक्षात्कार पर्याप्त विस्तृत है, तथापि पढ़े बिना नहींछोड़ा गया।

फरवरी अंक में चंद्रकिशोर जायसवाल का साक्षात्कार पर्याप्त विस्तृत है, तथापि पढ़े बिना नहींछोड़ा गया। प्रश्न लाल स्याही में, उत्तर नीली स्याही में, अच्छा छापा गया है। प्रश्न भी करीने से पूछे हैं अरुण अभिषेक ने। उनके उत्तर भी उसी करीने से दिए गए हैं। साक्षात्कार के साथ आवश्यक लगा कि जिसका साक्षात्कार लिया जाए उसका पूरा परिचय भी छापा जाए। इतने महत्वपूर्ण साहित्यिक अवदान के बाद भी कुछ नाम कुछ कम जाने सुने लगते हैं। इसलिए भी यह जरूरी है।

मार्च अंक में मेरे लिए अंक की उपलब्धि ख्यातनाम शाइर बशीर बद्र का साक्षात्कार है। रोहित कौशिक ने एक सार्थक साक्षात्कार प्रस्तुत किया है। उन्होंने कुएं की गहराई से अपनी रस्सी बाल्टी के जरिए काफी पानी उलीचा है। बशीर साहब ने भी पूरी बेबाकी एवं बिना किसी झिझक के उत्तर दिए हैं। हिन्दी गज़़ल के प्रति उनके मन में जो स्नेहभाव है, वह उजागर हुआ। पहले भी वे हिन्दी गज़़ल की भरपूर प्रशंसा कर चुके हैं। उनका हिन्दी गज़़ल के प्रति यह उदारता भाव प्रशंस्य है, अन्यथा कई बड़े शाइर इसकी खिल्ली ही उड़ाते हैं। हिन्दी गज़़ल को उर्दू की बहरों में लिखा जाना चाहिए या नहीं, इस पर उनका उत्तर बहुत स्पष्ट नहींहै। यहां साफगोई बरतना चाहिए थी। घुमा दिया है उन्होंने। ऐसे कैसे हो सकता है कि इतना बड़ा उर्दू का शायर यह न जानता हो कि उसकी गज़़ल किस बहर में है। जो हो। सुना है कि वे इन दिनों अस्वस्थ चल रहे हैं। उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हेतु कामना एवं प्रार्थना।

चंद्रसेन विराट,

121, बैकुंठधाम कालोनी, आनंद बाजार के पीछे, इंदौर-452018