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Sunday 27 May 2018

मार्च का अंक मिला। पत्रिका में निरंतर प्रगति हो रही है। जर्मन कहानी खुश चेहरा आज भी असंगत नहीं है। हमारे देश में भी यह हो सकता है।

मार्च का अंक मिला। पत्रिका में निरंतर प्रगति हो रही है। जर्मन कहानी खुश चेहरा आज भी असंगत नहीं है। हमारे देश में भी यह हो  सकता है। तिनके कहानी आज के ठगों  के जाल के बारे में है लेकिन लगता है कि लेखक को जल्दी थी और क्लाइमेक्स में मजा नहीं आया। आपका उपसंहार हमेशा की तरह जगाने वाला है। दु:ख तो इस बात का है कि भांड लोग मोदी की तारीफ़ ही किये जा रहे हैं। प्रस्तावना में बुज़ुर्गों के बारे में अलग दृष्टिकोण से देखा गया है। संदीप राशिनकर के चित्र बहुत कुछ कहते हैं। अंक के लिए बधाई।

दिलीप गुप्ते, इंदौर